कार्तिक स्नान — विनोद कुमार शर्मा

शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक चलने बाले कार्तिक मास में स्नान दान पुण्य का विशेष महत्त्व पुराणों में बताया गया है
भगवान विष्णुजी इनदिनों जल में निवास करते हैं सूर्योदय से पूर्व उठकर नदी सरोवर या घर में गंगा जल मिलाकर स्नान और भगवान विष्णु की आराधना के साथ तुलसी पूजन का विशेष महत्त्व होता है सुबह शाम तुलसी को दीपक और जल अर्पित करने से कुम्भ स्नान के जैसा फल प्राप्त होता है तुलसी में तीर्थराज पुष्कर गंगा और तुलसी दल में ही श्री कृष्ण जी का वास होता है
कार्तिक मास के महत्व को कार्तिकेय द्वारा भोलेनाथ ने कुछ इसी प्रकार से भगवान विष्णु की आराधना और तुलसी पूजन का महत्व बताया व्रज मण्डल में महिलाएं पवित्र यमुना जी मैं स्नान कर कृष्ण और तुलसी की पूजा-अर्चना व्रत में डूबी रहती हैं रुक्मिणी सत्यभामा को इसी व्रत के पुण्य प्रताप से जीवन साथी के रूप में श्री कृष्ण को प्राप्त किया था l
कार्तिक जी और सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना सूर्य षष्ठी पर की जाती तुलसी विवाह भी इसी पवित्र माह में होता और समापन होता
विनोद कुमार शर्मा




