एहसान — रमेश शर्मा

सुरेश जी हायर सैकंडरी स्कूल रींगस में गणित के वरिष्ठ अध्यापक थे। कमजोर बच्चों को निशुल्क घर बुलाकर गणित पढ़ाया करते थे। साल भर में बीसों बच्चों की स्कूल फीस स्वयं भर देते थे। उनका मानना था कि पैसे के अभाव के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए।
उनके स्वयं एक बेटा और एक बेटी थे। बेटा पिलानी से इंजीनियरिंग कर रहा था और बिटिया बी काम करके सीए कर रही थी। सरकारी स्कूल का मास्टर और इतने खर्चे। काफी परेशान रहने लगे।
लड़की की शादी करनी थी। पैसा हाथ में नहीं था। अभी तक का जीवन किराये के मकान में निकला। कई साल पहले सीकर में सौ गज का प्लाट सस्ते में पचास हजार रुपये में लिया था।
अब पांच साल बाद रिटायरमेंट आ रहा था।
उन्होंने सोचा बैंक से लोन लेकर मकान बनवा लिया जाए। सो आज वह स्टेट बैंक की रींगस शाखा में गये। बड़े बाबूजी से मकान के लिए लोन की बात की। उन्होंने कहा पहले ही बेटे की पढ़ाई का लोन चल रहा है। ऊपर से आप के रिटायरमेंट में पांच साल ही बाकी है। कोई गारंटी दे तो लोन मिल सकता है।
बेचारे पसीना पोंछते बैंक से बाहर निकल ही रहे थे कि एक स्मार्ट युवक ने गुरुजी प्रणाम कह कर पैर छुए। वे उसे पहचानने की कोशिश कर ही रहे थे कि वह बोला गुरूजी आपने शायद मुझे पहचाना नहीं। मैं रवि जिसे आपने ट्यूशन पढ़ाया था और तीन साल मेरी फीस भी भरी थी। आज यहाँ कैसे? उन्हें याद आया। बहुत खुश हुए फिर बोले क्या बताऊँ बैंक में मकान के लोन के लिए आया था लेकिन गारंटी मांग रहे हैं। क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा। उसने कहा कोई बात नहीं आप मेरे साथ आइए। वह उन्हें लेकर बैंक मैनेजर के केबिन में आया और घंटी बजा कर बड़े बाबूजी को बुलाया और कहा इनकी गारंटी मैं लेता हूं। इनका लोन एक हफ्ते में पास होकर इनके खाते में चला जाना चाहिए। कागजी कार्रवाई पूरी करवा लें। और दो चाय मेरे केबिन में भिजवा दें।
फिर सुरेशजी की ओर होकर बोला गुरुजी आपके आशीर्वाद से मेरी अभी यहाँ बैंक मैनेजर के रूप में पोस्टिंग हुई है। मैं आपका एहसान जिंदगी भर नहीं भूल सकता।
आपको कभी भी कोई बैंक से संबंधित समस्या हो तो बेझिझक तुरंत मेरे पास आ जाया करें।
सुरेश जी घर लौटते वक्त सोच रहे थे ईश्वर सभी के अच्छे बुरे कर्मो का हिसाब रखता है। ऐसा कहकर चश्मा उतार कर आंखों को पोंछा और खुशी खुशी घर आ गए।
रमेश शर्मा




