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एक चक्र जिंदगी का — नीलम सोनी

आज सोचा मन कई लग नहीं रहा था सोचा हॉस्पिटल और शमशान के चक्र लगा के आऊं। आज पता चला ।ये दो जगह है।जहां इंसान की अपने आप से रुबरु होता है। उसकी अहमियत क्या है जिंदगी मे ।कभी भी जिंदगी मे ।किसी चीज का घमंड आ जाए तो ।एक बार शमशान का चक्र जरूर लगा आना।तुमसे से बेहतरीन लोग यहां राख बनकर पड़े।जिंदगी कितनी अनमोल है। लोग पूरी जिंदगी गुस्सा नफरत जलन एक दूसरे को कोसने नीचा दिखाने छोटी छोटी बातों पे दिल पे लगा के पूरी जिंदगी एक दूसरे से बात तक नहीं करते है।दिल मे नफरत लेके बैठे रहते। आज अपने आप से जो भी किसी के प्रति दिल में कुछ भी गिला शिकवा था ।मैने निकाल दिया। हॉस्पिटल में गई वहां जाके देखा ।लोगों को इतनी बीमारियों ने पूरे शारीर की जकड़ रखा।खा पी नहीं सकते। बोल नही सकते।देख नही सकते।चल नहीं सकते। ये भी कोई जिंदगी है।रात भर हॉस्पिटल में रात भर रुक कर देखना।जिंदगी की कीमत पता चल जाएगी।कभी मरने का ख्याल आवे तो अस्पताल जाकर देखना लोग जीने के लिए क्या क्या नहीं करते। अस्पताल ही एक ऐसी जगह है। जहां अमीर भी गरीब भी सब धन डोलते छोड़ के बस एक ही दुआ करते है। हमे जल्दी से रही खुशी स्वस्थ कर दो। मैने महसूस किया मंदिरों से ज्यादा दुआओं की गूंज हॉस्पिटल में ज्यादा आती है।मैने भगवान का शुक्रिया किया। जो भी भगवान से कभी गुस्से मे बोल देती थी। आज पता चला जिंदगी कितनी अनमोल है। फिर शमशान की तरफ गया।वहां लोग बहुत इकट्ठे हो रखे थे। कुछ लोग रो रहे थे। पूरी जिंदगी निकाल दी। उन अपनो के साथ। अंत मे पता चला।मंजिल तो यही थी।पूरी जिंदगी निकाल दी।मेरे अपने ही मुझे छोड़ के चले गए। शमशान ऐसे लोगों की राख से भरा पड़ा है।जो सोचते थे अपने आप मे।हमारे बिना दुनिया चल नही सकती। शमशान की राख देख के मन में ख्याल आया। सिर्फ राख होने के लिए पूरी जिंदगी इंसान एक दूसरे से कितना जलता है। बस पूरी जिंदगी जिस ठाठ एकड़ में रहे। अंत मे खाली हाथ जाना है।अमीर गरीब सभी के लिए एक ही बिस्तर है । छोटी सी जिंदगी बड़ी अनमोल है मेरे दोस्त। हंसी खुशी निकाले।सब यही रह जाना। साथ कुछ जाना है नहीं हर पल में जिंदगी है।
नीलम सोनी

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