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संक्षिप्त लेख: मकर संक्रांति दान का पर्व  — पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’

 

मकर संक्रांति का पर्व जब माघ के महीने में सूर्य मकर रेखा पर उत्तरण करता है कब आता है।उसे मकर संक्रांति उत्तरायण पोंगल बिहू लोहड़ी नाम से जाना जाता है। सूर्य अपनी दिशा बदलते हैं। सूर्य उत्तर की ओर चलने लगता है। सूर्य का उत्तर की तरफ जाना बड़ा शुभ माना जाता है। आज के दिन संसार के लोग अच्छे कार्य करते हैं। नदियों में पवन स्नान करते हैं। अपने तन मन को शुद्ध और पवित्र करते हैं। अपने आप को शुद्ध और पवित्र मानते हैं। आज के दिन का महिमा है नदी में नहा कर पवित्र होकर दान पुण्य करते हैं।आज के दिन खिचड़ी का दान देना बहुत उत्तम माना जाता है। घरों में खिचड़ी बनाकर उसमें शुद्ध घी मिलाकर खाने का महत्व है। आज के दिन तिल गुड़ का लड्डू बनाते हैं। यह ठंड का महीना है ठंड में गुड़ और तिल मिलकर लड्डू खाने से स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। हमारे घर में बड़ी उत्साह से तिल गुड़ के लड्डू बनते हैं।यह लड्डू का सूर्य को भोग भी लगते हैं।आज के दिन दान से बहुत बड़ी उपलब्धि की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति धार्मिक पर्व के रूप में मनाया जाता है। सनातन संस्कार में धार्मिकता का प्रचार होता है। किसान खुशियों का इजहार सूर्य मकर के प्रवेश का प्रचार करते हैं। जाडा अब बुड्ढा होने वाला है और वसंत आने वाला है।आज छोटे बच्चे बड़े बहुत उत्साहित होकर पतंगे चगाते हैं।पतंगोत्सव भी मनाया जाता है। आकाश में रंग बिरंगी पतंगे दिखाई देता है।अनेकता में एकता का संदेश देता है। हंसी खुशी से सब मिलकर मकर संक्रांति का त्यौहार मनाते हैं।

“मकर संक्रांति सनातनी त्यौहार है बड़ा भारी,
सूर्य देव की करें उपासना दान पुण्य करते नर नारी।”

श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर-गुजरात)

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