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बोर्ड परीक्षा: बच्चों का नहीं, पूरे परिवार का संतुलन जरूरी

सुनीता त्रिपाठी अजय। नजर इंडिया 24 ब्यूरो चुफ

कुछ ही दिनों में बोर्ड परीक्षाएँ शुरू होने वाली हैं। यह समय डर और तनाव का नहीं, बल्कि समझदारी, संयम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का है। परीक्षा जीवन का अंतिम पैमाना नहीं है, लेकिन यह बच्चों की मेहनत, आत्मविश्वास और धैर्य की परीक्षा जरूर होती है। ऐसे समय में बच्चों के साथ-साथ माता-पिता की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

बच्चों को चाहिए कि वे इस समय नई पढ़ाई के बोझ में न पड़ें, बल्कि जो पढ़ा है उसी का हल्का-हल्का रिवीजन करें। जिन टॉपिक्स या प्रश्नों पर बार-बार भूल हो रही है, उनके लिए “जो याद नहीं आ रहा” वाली छोटी-छोटी क्लिक/शॉर्ट नोट्स बनाकर बार-बार देखें। इससे पढ़ाई आसान भी लगेगी और याददाश्त भी मजबूत होगी। मिशन शेखावाटी 100 की बुकलेट में दिए गए सार, महत्वपूर्ण प्रश्न और बिंदु इस समय बहुत उपयोगी हैं—उनका पूरा लाभ लें।

परीक्षा में एक बात हमेशा याद रखें—कोई भी प्रश्न खाली नहीं छोड़ना है। प्रत्येक प्रश्न को अटेंड करना है। अगर किसी प्रश्न का सटीक उत्तर याद न आए, तो उससे जुड़े आसपास के तथ्य, परिभाषा या उदाहरण लिख दें। प्रयास किया गया उत्तर अक्सर कुछ न कुछ अंक दिला ही देता है। साथ ही सुलेख का विशेष ध्यान रखें—उत्तर साफ, स्पष्ट और पढ़ने योग्य हों। बिंदुओं में उत्तर लिखना और जरूरी शब्दों को रेखांकित करना फायदेमंद रहता है।

परीक्षा हॉल में घबराएँ नहीं। प्रश्न पत्र मिलने पर पहले पूरा पेपर शांत मन से पढ़ें। जो प्रश्न अच्छे से आते हों, उन्हें पहले हल करें। समय का सही प्रबंधन करें और किसी एक प्रश्न में उलझकर बाकी पेपर न बिगाड़ें। गहरी साँस लें, पानी पिएँ और खुद पर भरोसा रखें।
अब बात माता-पिता की भूमिका की।

1. माता-पिता बच्चों पर बिना मतलब का पढ़ाई का दबाव न डालें।
2. बार-बार “कितने प्रतिशत आएंगे” या “इतने प्रतिशत लाने ही हैं” जैसे टारगेट तय न करें।
3. बच्चों की तुलना दूसरों से न करें, हर बच्चा अलग क्षमता वाला होता है।
4. घर का माहौल शांत और सहयोगी रखें, ताकि बच्चा मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करे।
5. बच्चों को यह भरोसा दिलाएँ कि परिणाम से ज़्यादा महत्वपूर्ण उनका प्रयास है।
सबसे जरूरी बात—बच्चे पूरी नींद लें, समय पर भोजन करें और खुद को रिलैक्स रखें। थका हुआ दिमाग बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता। आत्मविश्वास, संयम और परिवार के सहयोग से परीक्षा आसान बन जाती है। विश्वास रखिए—मेहनत और सच्चा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता, सफलता जरूर मिलेगी।
अजय शर्मा
(व्याख्याता-राउमावि ढाणी कुम्हारान)
(Ugc Net-Jrf)

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