Welcome to Nazar India 24   Click to listen highlighted text! Welcome to Nazar India 24
Uncategorized

संस्मरण:बारिश बनी आफत – श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर गुजरात)

 

जब मैं छोटे से गांव में प्राथमिक शिक्षक की नौकरी कर रहा था उसे समय की यह बात है। कुछ जरूरी काम होने सबब में अपने वतन गया और वापस आ रहा था तब अचानक बारिश शुरू हो गई। मैंने सोचा यहां बारिश है।शायद वहां नहीं भी होगी। मैं वहां पहुंचा तो बारिश जोर से बरस रही थी। बारिश रोकने का नाम न लेती थी। मैं नौकरी करता था उस गांव की चारों तरफ वोकला था। मुख्य मार्ग पर नदी थी। गांव एक टापू सा लगता था। जाए तो कहां जाए। आज मेरे लिए बारिश आफत बनी। बारिश कभी कभी विकराल रूप धारण करती है हमें संकट में डाल देती है।गांव के पास की नदी उफान पर आ गई। देखते ही देखते पानी सड़कों पर खेतों में फैल गया। निचाण वाले विस्तार में कई घरों में पानी घुस गया और लोगों का सामान बहने लगा बिजली और संचार सेवा भी ठप हो गई। मैं कभी पानी में उतरा नहीं था। मेरा जाना भी जरूरी था। पानी में मुझे डर भी लगता था। गांव के कुछ लोग सामने खड़े थे। वह रस्सा लेकर तैरता हुआ सामने तक पर आया। मुझे कहने लगा; ‘साहब,यह रस्सा पकड़ लो। पानी में घुमरी आए आपको खींचे तब भी यह रस्सा छोड़ना मत। मैं हूं आपको सामने किनारे ले जाऊंगा। और वो मुझे आसानी थी सामने किनारे ले गया। मैं जब किनारे पर पहुंचा तब निरांत की सांस ली।
आज भी जब बारिश आती है तो मुझे यह दृश्य की याद ताजा हो जाती है। यह संस्मरण मुझे हमेशा दिलाता है। प्रकृति जितनी सुंदर है उतनी ही शक्तिशाली भी है। इसीलिए हमें उसके साथ संतुलन बनाकर जीना चाहिए तभी हमारा भविष्य सुरक्षित और सुखद होगा। संकट की घड़ी में मानवता सहयोग और सेवा का महत्व भी मैं बहुत करीब से महसूस किया।

श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर गुजरात)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!