प्यार करने में और पसंद करने में अंतर — महेश तंवर

प्यार करना और पसंद करना दोनों अलग-अलग है। प्यार इंसान इंसान से करता है, पशु पक्षी जानवर से करता है, पेड़ पौधे समस्त वनस्पति से करता है, परमात्मा की विभिन्न संरचना से करता है। लेकिन प्यार करने का मतलब यह नहीं है कि उन सबको हम प्राप्त करना चाहते हैं बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए मन के भाव होते हैं उनका सम्मान करना होता है। नदी, नाले, पहाड़, वन यह सब इस प्रकृति का व समस्त धरातल का संतुलन बनाए रखने के लिए सहायक है।
उपर्युक्त सभी एक दूसरे को बनाए रखने के लिए सहायक है । उनका संतुलन बनाए रखने के लिए यह जीवन चक्र है । यह प्रकृति की सुंदर व्यवस्था है ।
यह सब मनुष्य सोच समझकर अखंड मंडलाकार से प्यार करता है। उन्हें सम्मान देता है और देना भी चाहिए। लेकिन पसंद करना यह अलग मायने रखता है। पसंद करना तो प्रेम करने के परिणामस्वरूप प्राप्त करने का एक भाव है। जिसे जीवन उपयोग के लिए प्राप्त किया जा सके।
उदाहरणार्थ एक दिन मैं गुलदस्ता बनाने के लिए बगीचे में फूल तोड़ता हूं। वहां सभी पेड़- पौधे , लताएं, उन पर लगे हुए सभी फूल बहुत सुंदर थे ,बहुत प्यारे लग रहे थे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि मुझे वह पूरा बगीचा ही घर लाना था, बल्कि गुलदस्ता के लिए जितने फूल पसंद आए वह मैं लेकर आ गया।
उपर्युक्त व्याख्यान से स्पष्ट होता है कि प्रेम करना अलग बात है और पसंद करना अलग बात है।
महेश तंवर सोहन पुरा
नीमकाथाना (राजस्थान)




