हरितालिका तीज — महेन्द्र कुमार सिन्हा

भादों मास के शुक्ल पक्ष की तिथि तीज को हरितालिका तीज कहा जाता है। हरितालिका तीज वैसे तो संपूर्ण भारत में मनाया जाता है ।इस को माता बहन बेटी करती है ।शिव जी माँ पार्वती जी की पूजा अर्चना कर मनवाँछित वर पाती है। सुहागिन नारी अपने पति के दीर्घ जीवन की कामना करते हैं। तथा अविवाहित बेटियाँ सुन्दर घर वर की कामना से ये हरितालिका तीज व्रत करती है। हरितालिका तीज में फुलेरा लगाने और पाँच फुलेरा दर्शन करने का बड़ा महत्व है।
हमारे छत्तीसगढ़ मंच अमावास को पोला पर्व मनाते है।बैल जाता पोरा का पूजा करते है। दूज को करू भात (करेला भात) खाते है ।और तीज हरितालिका व्रत उपवास करते है । शिव जी माता पार्वती जी की पूजा अर्चना करते है।परंपरा के अनुसार बहन बेटी मायके में पिता भाई लाते है।उचित मान सम्मान करते है।साड़ी ब्लाउज छाया चुड़ी बिंदी माहुर आदि श्रृंगार देते हैं।
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा मंदिर दर्शन कर उपवास खोलते है।इस तरह हरितालिका तीज का पावन पर्व महान है।
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय महासमुंद छत्तीसगढ़




