स्वदेशी की बात हो — विनोद कुमार शर्मा

आज समय चक्र की चाल में यदि उसके साथ नहीं चले तो बहुत पीछे छूट जाएंगे
गाँधी जी के चरखे की प्रासंगिकता बरकरार है प्रतीक इस बात का स्वावलंबी बनना जरूरी लेकिन कैसे!समय ने चरखा हस्तकरघा सब लील लिए आधुनिकीकरण मशीनीकरण तकनीक में जो बड़े वो बचे
जो पिछड़ गए वहीं पड़े
आज का ज्वलन्त मुद्दा टैरिफ जिसे हम जजिया कर का अंतरराष्ट्रीय रूप कहेंगे तो ज्यादा उपयुक्त होगा दुनियां का शक्तिशाली अर्थव्यवस्था का देश यदि प्रायमरी स्कुल के बच्चों की तरह व्यवहार करे जैसे तुम्हें हमसे दोस्ती रखना तो उससे बात मत करो उससे ये मत लो वो मत लो और हम देंगे नहीं l
एसे माहौल में कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे दूसरा आगे करोगे तो वो नहीं रुकेगा
आज जरूरत इतिहास से अनुभव लेकर
टैरिफ का जबाब टैरिफ ही हो सकता हमने कई बार प्रतिबन्ध झेले हम सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे बड़ा बाजार हमारे पास है थोड़ी दिक्कत तो होगी लेकिन किसी एक पर निर्भरता और स्वतंत्र नीति के लिए उठकर जबाब देना आवश्यक जो दिया जा रहा l
एसे कठिन समय में स्वदेशी अपनाने का मंत्र बहुत कारगर होगा हम विदेशी खानपान और उत्पादों का बहिष्कार कर देश सेवा में योगदान कर सकते l
विनोद कुमार शर्मा




