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बाढ़ की विभीषिका — विनोद कुमार शर्मा

हर बर्ष प्रकृति का प्रकोप बाढ़ के रूप में
सामने आता कुछ प्राकृतिक कुछ मानवीय
कारण इसका कोई समाधान स्थाई हल नहीं
निकलता इस वर्ष पहले उत्तराखंड हिमाचल जम्मू-कश्मीर अब पंजाब दिल्ली की विषम
स्थिति हाहाकार मचा है l
मानव पशु व्यापार कृषि धर द्वार प्रभावित
हो रहे स्थाई हल नदियों को जोड़ना अधिक खर्चीला और इतने बड़े पैमाने पर सम्भव नहीं
हमे स्वंम मिलकर प्रकृति संरक्षण पर विशेष और अनिवार्य रूप से प्रकृति से जुड़ने उसे समझने और उसका साथ देने आगे आना होगा l
नदियों तालाबों पर लगातार अतिक्रमण कचरा डंपिंग पेड़ पौधों की अन्धाधुन्ध कटाई
रेत का अत्यधिक उत्खनन और पहाड़ों में सुरंगों और बाँध बनाने उत्खनन रोकने पर सख्त कानून और जनजागरण जन जन को प्रकृति से जोड़ने अभियान चलाना होगा l
यूपी विहार में गंगा का रौद्र रूप बिहार में प्रतिवर्ष कोशी नदी के कहर आसाम में चीन द्वारा पानी छोड़ने से बिगड़ती स्थितियों पर दूरगामी नीतियों को अमल में लाना होगा
आज बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता एनजीओ और देश वासियों को मिलकर उनकी बड़े पैमाने पर फौरी सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी लेनी होगी सरकारें अपने स्तर पर लगातार राहत देने में लगीं वो नाकाफी है l
एक व्यक्तिगत सुझाव भी मन्दिरों में चढ़ावे की अरबों की संपत्तियों से मन्दिरों के ट्रस्टियों को आगे आकर बाढ़ पीड़ितों की सहायता करना चाहिए l
विनोद कुमार शर्मा

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