लघु कथा: हादसा : मानवता की महक — पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’

मनुष्य जीवन में कई हादसे होते हैं। कई हादसे ऐसे होते हैं कि आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों ही बदल देते हैं। कहीं हादसे वियोग करवाता है कहीं हादसे मिलन भी करवाता है। कई हादसे ऐसे भी होते हैं कि मानवता की महक भर देते हैं।
एक छोटे से गांव में भारतभाई ने खेतीबाड़ी संभालने के लिए लाधुभाई को साथी रखा था। सुबह उठकर लाधुभाई ट्रैक्टर लेकर खेत चले जाते थे। भारतभाई मालिक थे और लाधुभाई उसका नोकर यानी खेत में काम करने वाला साथी था। मगर दोनों भाई की तरह रहता था। ट्रैक्टर चलाने में मदद भी करता था।लाधुभाई को जरूरत हो मदद भी करता था। एक परिवार की तरह उसको रखता था।
एक दिन ऐसा हादसा हुआ भरतभाई ट्रैक्टर चलाते थे और लाधुभाई पीछे कल्टी पर बैठा था। अचानक कल्टी में लाधुभाई का पैर फिसल गया और कल्टी की धार से आधा पैर कट गया। तात्कालिक अस्पताल ले गए। चिकित्सा भी की मगर लाधुभाई एक पैर से अपंग हो गए।अब वो खेती के काम करने लायक नहीं रहा। भारतभाई ने लाधुभाई से आश्वासन देते हुए कहा;’ लाधुभाई, तुम मेरे भाई जैसे हो।’ चिंता मत करना तुम्हें अब काम भी नहीं करना है और मेरे साथ मेरे भाई बन कर रहना है। हम दूसरा साथी रख लेंगे वो काम करेगा।
गांव वालों को यह पता चला तो भारतभाई की प्रसंसा करने लगे। भारतभाईने कहा;’अच्छे और सच्चे रिश्ते न मोल देकर खरीदे जा सकते है न उधार लिए जा सकते है इसलिए उन लोगों की कदर कीजिए जो आपको महत्व देते है। आपका सम्मान करते है।मेरे पिताजी के समय से लाधुभाई हमारे यहां काम करते थे। पहले बैल से खेती काम करते थे। सारी जमीन वो अकेले संभालते थे तब तो मैं छोटा था। अब वो काम करने लायक नहीं है तो मेरी फर्ज बनती है ।उसको हम संभाले। लाधुभाई ने हमें बहुत कमाकर दिया है। हमारे परिवार पर उनका उपकार है मैं नहीं भूल सकता।साथी वो जो हरदम साथ निभाए राहमें कभी छोड़ ना जाऐ डटके साथ खड़ा रहें हरहाल में मुश्किलों से ना गभरायें। भारतभाई ने मानवता की एक मिसाल खड़ी कर दी।दोस्तों मानवता ही सच्चा धर्म है।
“मानवता की सौरभ सुरभित हो सारा चमन,
पुष्प खिलाते संस्कारों का उजाला हो जहान।”
पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’ सुरेंद्रनगर गुजरात




