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उत्सव त्योहार लाते खुशियां अपार – सुनीता तिवारी”सरस”

 

उत्सव और त्योहार केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं होते,वे हमारे जीवन में उमंग,अपनापन और खुशियों के रंग भरने वाले अवसर हैं। इनके आने से घर-आँगन सज उठते हैं, रिश्तों में मिठास घुलती है और मन में नई ऊर्जा का संचार होता है। हर त्योहार अपने साथ कोई न कोई सांस्कृतिक, धार्मिक या सामाजिक संदेश लेकर आता है।

त्योहारों के बहाने परिवार और मित्र एक साथ आते हैं। व्यस्त जीवन में कुछ पल अपनों के साथ बिताने का अवसर मिलता है। घरों में पकवान बनते हैं, दीप जलते हैं, रंग-बिरंगी सजावट होती है और वातावरण हँसी-खुशी से भर जाता है। बच्चों के लिए ये उत्सव विशेष आनंद लेकर आते हैं, वहीं बड़े-बुजुर्ग अपनी परंपराओं और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाते हैं।

हमारे देश की विविधता भी त्योहारों में सुंदर रूप से दिखाई देती है। अलग-अलग प्रदेशों और समुदायों के पर्व भले ही अलग हों, लेकिन उनका मूल भाव प्रेम, सद्भाव और एकता ही है। यही विविधता भारत की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध बनाती है।

त्योहार हमें यह भी सिखाते हैं कि खुशियाँ केवल अपने तक सीमित न रहें। जरूरतमंदों के साथ खुशियाँ बाँटना, प्रकृति का सम्मान करना और आपसी प्रेम बनाए रखना ही उत्सव की सच्ची सार्थकता है।

वास्तव में उत्सव और त्योहार जीवन की एकरसता को दूर कर उसमें उल्लास के रंग भरते हैं। वे हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। इसलिए कहा जा सकता है उत्सव-त्योहार आते हैं तो खुशियाँ अपार लाते हैं।

सुनीता तिवारी”सरस”

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