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अनंत चतुर्दशी — कृत्या नंद झा अमृत

 

अपने अनंत रूप में रहते हैं श्री हरि
उनके पूजन का शुभ तिथि है अनंत चतुर्दशी
ब्राह्मण सुमंत के बेटी सुशीला से जुड़ी है कथा
जिसके पति परमेश्वर थे कोडिन्य ऋषि l

विवाह पश्चात्‌ जब सुशीला ससुराल चली
विमाता से ईंट पत्थर बाँध कर उपहार में दी
पति को अपमान लगा फिर भी सुशीला थी भली
दुःखी मन से चली पति संग अपने पति संग रहने लगी l

एक दिन सुशीला ने नदी तट पर
अनंत पूजन कथा श्रवण की
चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र लाकर पति के बाँह में बाँध दी
कोडिन्य को लगा कि सुशीला कोई मोहिनी जादू कर रही है
अनंत सूत्र को तोड़कर अग्नि में फेंक कर हरि को अपमानित किया l

ऋषि वैभव शून्य हुआ चिंताओं ने घेरा
मंगल के जगह रहने लगा अमंगल का डेरा
पत्नी के कहने से खोजने निकले अनंत भगवान को
हरि मिले अनंत रूप में मिट गया जीवन से सब अंधेरा l

श्रीकृष्ण के कहने से युधिष्ठिर ने भी अनंत पूजन किया था
अनंत के आशीर्वाद से कुरुक्षेत्र में विजयी हुआ था
जो अनंत देव की पूजा करते वैभवशाली हो जाते हैं
धन धान्य आरोग्य सौभाग्य का हरि से आशीर्वाद पाते हैं l

कृत्या नंद झा अमृत

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