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मां कात्यायनी की लघुकथा  — नरसा राम जांगु

माँ कात्यायनी की कथा एक पौराणिक और पवित्र कथा है, जो देवी भागवत पुराण में वर्णित है। माँ कात्यायनी की उत्पत्ति की कथा इस प्रकार है:एक समय की बात है, जब महिषासुर नामक राक्षस ने स्वर्ग और पृथ्वी पर अपना आतंक फैला रखा था। देवताओं ने उसकी शक्ति के आगे हार मान ली थी और वे अपनी रक्षा करने में असमर्थ थे। देवताओं ने भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शरण ली और उनसे अपनी रक्षा करने की प्रार्थना की।भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर एक अद्भुत शक्ति का सृजन करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपनी शक्तियों को एकत्रित करके एक अद्भुत देवी का रूप दिया, जो माँ कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुईं।माँ कात्यायनी की उत्पत्ति कात्यायन ऋषि के आश्रम में हुई थी, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है। माँ कात्यायनी को दस भुजाएँ और लाल रंग का वस्त्र पहनाया गया था। उन्हें सिंह की सवारी दी गई थी और उन्होंने अपने हाथों में विभिन्न आयुध धारण किए थे।माँ कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया और देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। माँ कात्यायनी की शक्ति और साहस की कहानी आज भी प्रसिद्ध है और उनकी पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है।

नरसा राम जांगु
डीडवाना राजस्थान
भारत

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