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सरकारी कार्यालयों और न्यायालयों में हिन्दी की अनदेखी पर शिक्षाविद् दीपक शर्मा की चिंता

हिन्दी की व्यावसायिक शिक्षा में भूमिका-
14 सितम्बर 2025 राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर यह दीपक शर्मा ने कहा कि:

“हिन्दी केवल साहित्य की भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा और प्रबंधन जैसे आधुनिक विषयों की भी अभिव्यक्ति का माध्यम बन सकती है। यदि हम छात्रों को MBBS, इंजीनियरिंग, लॉ और मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रम हिन्दी में पढ़ाने का विकल्प दें, तो यह न केवल उनकी समझ को बेहतर बनाएगा, बल्कि हिन्दी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी मिलेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि जब फ्रांस, जापान, जर्मनी जैसे देश अपनी-अपनी भाषाओं में विज्ञान और तकनीकी शिक्षा प्रदान कर सकते हैं, तो भारत में हिन्दी को क्यों नहीं अपनाया जा सकता?

सरकारी कार्यालयों में हिन्दी की स्थिति चिंताजनक है ।
दीपक शर्मा ने सरकारी कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा:
“भले ही संविधान के अनुच्छेद 343 में हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया हो, लेकिन आज भी अनेक सरकारी कार्यालयों में अंग्रेज़ी को ही प्राथमिकता दी जाती है। यह स्थिति भारतीय जनमानस के साथ अन्याय है, जो हिन्दी को सहजता से समझता और अपनाता है।”

उनके अनुसार सरकारी फ़ाइलों, नोट्स, और संवादों में अधिकाधिक हिन्दी का प्रयोग होना चाहिए, ताकि प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम की जा सके।
न्यायपालिका और हिन्दी
दीपक शर्मा ने न्यायालयों में भी हिन्दी के उपयोग को बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया:

“भारत के उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में आज भी निर्णय और बहसों का प्रमुख माध्यम अंग्रेज़ी है, जो कि आम नागरिक की समझ से परे है। अगर न्याय प्रणाली आम जन के लिए है, तो उसकी भाषा भी आम जन की होनी चाहिए — और वह है हिन्दी।”

उन्होंने सुझाव दिया कि उच्च न्यायालयों में भी हिन्दी में बहस और निर्णय देने की व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे न्याय और अधिक सुलभ बन सके।
“हमें हिन्दी को केवल एक भाषा के रूप में नहीं, बल्कि एक शक्ति के रूप में देखना होगा। हिन्दी में विज्ञान है, तर्क है, संवेदना है और आत्मा है। यदि भारत को सशक्त बनाना है, तो उसकी भाषा को सशक्त बनाना होगा — और हिन्दी को राष्ट्र की संपूर्ण व्यवस्था में सम्मानपूर्वक स्थान देना होगा।”
शिक्षाविद् एवं अधिवक्ता दीपक शर्मा Jangid

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