दशहरा पर्व — उर्मिला पाण्डेय

दशहरा का अर्थ है दसों दिशाओं में खुशहाली लाना भरा स्वच्छ वातावरण होना प्रकृति भी खुशहाली लाए शस्य श्यामला भूमि हो उसे दशहरा कहते हैं।
दशहरा पर्व भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है दशहरा अर्थात दशमी तिथि शुक्ल पक्ष साल में दो बार आता है।एक दशहरा ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष जब सगर के साठ हजार पुत्र भगवान कपिल के शाप से जलकर भस्म हो गये इस कारण संसार में बहुत बिघ्न बाधाएं छाई हुई थीं तभी उनकी मुक्ति के लिए सगर ने अंशुमान ने असमंजस ने बहुत प्रयास किया अंत भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा ने पृथ्वी पर आना स्वीकार कर लिया भागीरथ गंगा जी को पृथ्वी पर लाए इसी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी (दशहरा)के दिन इस लिए इसे गंगा दशहरा कहते हैं और भागीरथ गंगा को लाए इस कारण गंगा को भागीरथी कहते हैं।यह था गंगा दशहरा।
दूसरा आश्विन माम शुक्ल पक्ष दशमी को दशहरा मनाया जाता है ।जब राक्षसों के अत्याचार से संत महात्मा ऋषि, मुनि तपस्वी योगी बहुत दुखी थे राक्षस इन्हें पूजा पाठ नहीं करने देते थे। बहुत से संत महात्माओं को राक्षसों ने मार डाला तभी भगवान ने अवतार लिया।
जैसा कि तुलसी दास ने कहा है विप्र धेनु सुर संत हित,लीन मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनू माया गुन गोपार।।
अर्थात भगवान ब्राह्मण गाय देवता और संतों के हित के लिए अवतार लेते हैं।यही कारण था पृथ्वी पर खर दूषण कालनेम रावण कुंभकर्ण आदि राक्षसों का अत्याचार फैला हुआ इनके अत्याचार से पृथ्वी भी कांप रही थी तभी भगवान पूर्ण बृह्म परमात्मा श्री राम का अंशों सहित चार रूपों में अवतार हुआ। भगवान श्री राम ने चौदह बरस के बनवास में राक्षसों का
संहार किया अंत में दस सि र वाले रावण का आश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी को वध किया दसों दिशाओं में मर्यादा और धर्म स्थापित किया।रावण के अत्याचारों से सबको मुक्ति दिलाई वातावरण शुद्ध किया दसों दिशाओं में धर्म की ध्वजा लहराने लगी।राम राज्य स्थापित किया। यही है दशहरा का अर्थ।
उर्मिला पाण्डेय उर्मि कवयित्री मैनपुरी उत्तर प्रदेश।




