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रिश्तों की अहमियत — नरसा राम जांगु

 

रोहन अपने दादा जी के साथ रहता था। दादा जी उसे बहुत प्यार करते थे और रोहन भी उन्हें बहुत प्यार करता था। एक दिन, रोहन के माता-पिता ने एक नया घर खरीदा और वे सभी वहां शिफ्ट हो गए। रोहन को नया घर पसंद आया, लेकिन वह दादा जी को छोड़कर जाने को तैयार नहीं था।दादा जी ने रोहन को समझाया, “रोहन, तुम्हारे माता-पिता के साथ जाना जरूरी है। मैं यहीं रहूंगा और तुम्हारी प्रतीक्षा करूंगा।” रोहन ने दादा जी को गले लगाया और कहा, “दादा जी, मैं आपको कभी नहीं भूलूंगा।”समय बीत गया और रोहन बड़ा हो गया। वह अपने माता-पिता के साथ खुश था, लेकिन उसे दादा जी की याद हमेशा आती थी। एक दिन, रोहन ने अपने माता-पिता से कहा, “मम्मी-पापा, मैं दादा जी के पास जाना चाहता हूं।”माता-पिता ने रोहन को दादा जी के पास भेज दिया। रोहन ने दादा जी को देखा और उनकी गोद में बैठ गया। दादा जी ने उसे गले लगाया और कहा, “रोहन, मैं तुम्हें बहुत याद करता था।”रोहन ने कहा, “दादा जी, मैं भी आपको बहुत याद करता था। मैं समझ गया हूं कि रिश्ते कितने महत्वपूर्ण होते हैं।”दादा जी ने मुस्कराते हुए कहा, “बेटा, रिश्ते ही हैं जो हमें जीने का अर्थ देते हैं। उन्हें सहेजना और मजबूत बनाना जरूरी है। रोहन ने दादा जी के साथ समय बिताया और उनके अनुभवों से सीखा। उसे एहसास हुआ कि रिश्तों की अहमियत को कभी कम नहीं आंकना चाहिए।

नरसा राम जांगु
डीडवाना राजस्थान
भारत

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