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संस्कार और सृजन का संगम — गांधी स्मारक निधि स्कूल में विद्यार्थियों ने मंचित की रामलीला, रावण का पुतला बना आकर्षण

 

समालखा (पानीपत) — लोकेश झा

समालखा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ हस्तकला, दस्तकारी, पर्वों और संस्कृति से परिचय आवश्यक है। गांधी स्मारक निधि पब्लिक स्कूल, आश्रम पट्टीकल्याणा — जिसकी बुनियाद गांधीजी द्वारा स्थापित “नई तालीम” पर आधारित है और जिसे देश की नई शिक्षा नीति में भी स्थान मिला है — उसी भावना के अनुरूप शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है।दशहरा की पूर्व संध्या पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक रामलीला का मंचन किया। इस अवसर पर बच्चों के माता-पिता ने पूर्ण सहयोग दिया और अपने बच्चों को रामलीला के विभिन्न पात्रों के रूप में घर से सुसज्जित कर भेजा।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा — रावण का पुतला, जिसे विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना और दस्तकारी कौशल से स्वयं विद्यालय में तैयार किया। पुतले के निर्माण में संबंधित सभी कार्य बच्चों द्वारा ही संपन्न किए गए।राम की भूमिका मिष्टी, सीता की भूमिका सृष्टि, हनुमान की भूमिका रौनक, और लक्ष्मण की भूमिका विराट ने निभाई।

इस अवसर पर गांधी स्मारक निधि के मंत्री श्री आनंद शरण, विद्यालय की निदेशिका श्रीमती कमलेश गुलाटी, और संचालिका श्रीमती सुनीता शर्मा उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों, श्रीमती सुदेश, श्रीमती पूनम, तथा सभी शिक्षिकाओं को रामलीला मंचन की सफलता पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।सर्व सेवा संघ सेवाग्राम, गांधी स्मारक प्राकृतिक चिकित्सा समिति दिल्ली एवं देश के अन्य गांधीवादी संगठनों से जुड़े वरिष्ठ गांधीवादी श्री अशोक शरण ने विद्यालय के गांधी विचार से ओत-प्रोत विद्यार्थियों और स्टाफ की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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