जिंदादिली (दिल खोल के जिए) – नीलम सोनी

“सदैव आभार के साथ जीवन को देखें…” शुक्रिया करे जिंदगी की
जिंदगी में जिंदा रहना भी एक बड़ा सौभाग्य की बात है
रात की नींद पूरी नहीं हुई,
तो शुक्र मनाइए —
आपके पास छत है, बिस्तर है,
सोने को शांति है।
सुबह मोबाइल में 100 मैसेज आए,
तो गुस्सा नहीं मुस्काइए —
आप अकेले नहीं, आपके अपने हैं।
बच्चे शोर मचाएं,
तो डाँटने से पहले सोचिए —
आपके आँगन में किलकारियाँ हैं,
वरना निःसंतान घर कितने सूने होते हैं।
ऑफिस जाने में मन न लगे,
तो याद करिए —
आपके पास रोज़गार है,
जिससे आप अपनों का पेट भरते हैं।
सब्ज़ी वाला ज़्यादा पैसे माँगे,
तो झगड़ा न कीजिए —
सोचिए, आप उसे दे सकते हैं।
कितने ही लोग मांग भी नहीं सकते।
गाड़ी पुरानी हो गई है,
तो भी गर्व करिए —
आपके पास सफ़र करने का माध्यम है।
कई पैदल चलते हैं रोज़।
शरीर थक जाता है दिन भर में,
तो शुक्र कीजिए —
आप काम करने लायक हैं।
कई लोग बिस्तर से उठ भी नहीं सकते।
घर में सफाई करनी पड़ती है,
तो मुस्कराइए —
आपके पास घर तो है।
जीवन में जो है, उसके लिए शुक्रगुज़ार होइए,
क्योंकि जो नहीं है, वो सोचने से नहीं आता —
पर जो है, उसका सम्मान करने से
ज़िंदगी संवर जाती है।
प्रार्थना से पहले सेवा करें,
क्योंकि सेवा ही सच्ची भक्ति है।
मुस्कराइए, आगे बढ़िए —
क्योंकि जीवन एक सुंदर उपहार है! नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर राजस्थान




