लघुकथा — पिता आसमान होता है — अनिता शर्मा

“”पापा!!पता है….निक्की की शादी है,,और शीघ्र ही सारी रस्में शुरू हो जाएंगी। अब अपन क्या करें?? आप भी स्वस्थ नहीं हो, विक्की के स्कूल में कार्यक्रम है। उसकी ड्रेस ही दो हजार की आएगी। आजकल लड़कियाँ ही नहीं लड़कों का भी एक जैसे पहनावा, पूरा परिवार एक ही रंग में दिखता है। हर रस्म का अलग दिखावा। कितना खर्च आएगा?ऐसा करते हैं आप और मैं नहीं चलते,,मम्मी,रिकी (बहु)और विक्की चले जाएंगे…..बोलते हुए अर्पित की साँस फूल गई। और सामने आता हुआ खर्च दिखाई देने लगा जो अनावश्यक था।
पिता जबसे बीमार हुए सारा भार अर्पित पर ही आ गया था। घर, बाज़ार,नौकरी, बच्चे का स्कूल,रिश्तेदारी निभाना, आना-जाना सारा दारोमदार बेटे बहु पर ही आ गया था। आमदनी कम थी और खर्च ज्यादा। सिर्फ अर्पित को हिम्मत थी कि पिता का साया उसके ऊपर है।
इसी चिंता में था कि काका सोचेंगे कि खर्च के कारण हम विवाह में नहीं आ रहे हैं। तभी पिता ने अर्पित को बुलाया और अपनी संदूक की चाभी दे उससे खुलवाया। फिर अपनी फ़ाइल में से एक fd जो इसी महीने पूरी होने वाले थी अर्पित को पकड़ा दी। वह भी चकित रह गया कि “”पापा आपने मुझे बताया क्यों नहीं अब तक?””
पिता मुस्करा दिए और बोले “”बेटा मैं तुम्हारा बाप हूँ “”तुम्हें कष्ट में नहीं देख सकता “”।लेकिन मेरी हिदायत सुनो….””इस fd को खर्च नहीं करना है सिर्फ इस पर लोन ले लो और ब्याह आराम से करो “”बस ऐसे ही मैंने भी जिम्मेदारी निभाई है अब तुम्हारी बारी है “”।
अर्पित की आंखे नम हो गईं। वह समझ गया कि सच “”पिता आसमान ही होता है “”।
अनिता शर्मा
देवास (मध्य प्रदेश)
मौलिक और स्वरचित



