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पंडित दीनदयाल उपाध्याय और पर्यावरण संरक्षण — सरिता चौहान

 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी विचार की अगर हम बात करें तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने पर्यावरण संरक्षण को जीवन का एक अभिन्न अंग माना है । उनके अनुसार मानव, पशु और पादप सभी एक जैविक समुदाय हैं जो कि प्रकृति के एक अभिन्न अंग है। उनके अनुसार प्रकृति का पोषण एक मां के रूप में होना चाहिए ।मां जिस प्रकार अपने बच्चों का ख्याल रखती है प्रकृति भी उसी प्रकार हमें अपनी गोद में लेकर संरक्षण प्रदान करती है इसलिए हमें प्रकृति का सम्मान एक मां के रूप में करना चाहिए उसे किसी भी प्रकार की क्षति होने से बचाना चाहिए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी प्राकृतिक संसाधनों की संरक्षण करना अपना परम और पुनीत कर्तव्य मानते थे और इसके प्रति लोगों को जागरूक करना उनके एकात्म मानवतावाद का अभिन्न अंग है। उन्होंने टिकाऊं कृषि प्रणाली पर जोर दिया और प्राकृतिक खेती को लाभकारी बताया । जिससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि व्यवस्था में भी लचीलापन बनी रहे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपने पूरे जीवन में समाज और राष्ट्र की सेवा को सर्वोपरि स्थान दिया। उनका मानना था कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक आम नागरिक का अहम् कर्तव्य होना चाहिए इस अहम् और पुनीत कर्तव्य को निभाने के लिए उनके जयंती पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” नामक अभियान चलाया गया। उनका मानना है कि हर पौधा हमारे जीवन और राष्ट्र की उन्नति के लिए एक नई दिशा है जब तक हमारा पर्यावरण सुरक्षित नहीं होगा तब तक हमारे लिए स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहेंगी और जब हम स्वस्थ नहीं रहेंगे तो राष्ट्र के विकास में सहभागिता कैसे करेंगे। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी का मानना है कि हम सब के जीवन में मां का दर्जा सबसे ऊंचा होता है और प्रकृति भी हमारी मां है इसलिए हमें प्रकृति की सेवा वैसे ही करना चाहिए जैसे हम अपनी मां का करते हैं तभी प्रकृति भी हमें मां की तरह स्नेह और सुरक्षा प्रदान कर पाएगी। उन्होंने दुनिया भर के लोगों से यह अपील की कि हमारी अपनी मां और प्रकृति मां के बीच एक सुंदर सामंजस्य स्थापित होना चाहिए। इसी प्रेम आदर और सम्मान के प्रतीक के रूप में एक पेड़ मां के नाम लगाने और धरती मां की रक्षा करने का संकल्प लेने के लिए विश्व भर के लोगों से आह्वान किया ।गौर तलब है कि केंद्र और राज्य सरकार के विभाग भी एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए सार्वजनिक स्थलों की पहचान करेंगे और पर्यावरण दिवस की थीम भूमि क्षरण को रोकना सुखे से निपटना मरुस्थलीकरण को रोकना इसको कारगर बनाने में अपनी अहम् भूमिका निभाएंगे।
हम सभी जानते हैं कि पेड़ लंबे समय तक हमें प्रदूषण से मुक्त करने की क्षमता रखते हैं ,भूमि क्षरण को रोकते हैं ,ऑक्सीजन पहुंचते हैं और जलवायु और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने में कारगर सिद्ध होते हैं। एक पेड़ मां के नाम अभियान का मूल उद्देश्य हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना ,जल संरक्षण करना ,मृदा संरक्षण और वन्य जीव का संरक्षण करना है। इन सभी के लिए वर्तमान परिदृश्य में वृक्षारोपण नितांत आवश्यक है। हम यह मान कर चलें कि पेड़ों के बिना पृथ्वी पर जीवन नहीं है। पेड़ हमारे विकसित भारत की संकल्प यात्रा में एक महत्वपूर्ण योगदान देंगे ऐसा यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का मानना है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच के द्वारा प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और पर्यावरण संरक्षण पर चिंता व्यक्त की जा रही है । जल अधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासचिव का मानना है कि भूमि के नमी को बनाए रखने के लिए पेड़ के महत्व पर जोर दिया जाना पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सराहनीय प्रयास है । उनका मानना है कि पानी बिकना नहीं चाहिए पानी एक प्राकृतिक संपदा है जिस पर जीव जंतु पशु पौधे और मानव सभी का समान रूप से अधिकार है। इस प्रकार हम सभी को उत्साह पूर्वक पौधा रोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
सरिता चौहान ।
प्रवक्ता हिंदी
पीएम श्री एड राजकीय कन्या इंटर कॉलेज
लेखिका एवं कवयित्री
गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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