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रिश्तो में स्पेस जरूरी है — सुमन झा “माहे “गोरखपुर

रिश्तो में थोड़ा स्पेस होना जरूरी है यह मैं इसलिए कह रही हूं कि पहले के समय में जब परिवार में पति-पत्नी के अतिरिक्त अन्य लोग भी रहते थे तो वैवाहिक संबंध को लेकर इतनी समस्याएं नहीं थी इसका एकमात्र कारण यह था इन दोनों के बीच में अच्छा खासा स्पेस रहता था दिन में यह लोग कम मिल पाते थे कुछेक तो एक मात्र रात में मिलते थे तो अपने प्यार मोहब्बत को संभालते थे लेकिन मोबाइल ने आज हर स्पेस को खत्म कर दिया है एक-एक पल की अच्छी बुरी रिपोर्ट एक दूसरे को रहती है । आज सिर्फ हस्बैंड वाइफ रहते हैं उनमें हर समय चिक चिक होती रहती है और नतीजा विच्छेद!!!इसमें कम भूमिका हमारे फिल्मों और सीरियलों का नहीं है फिल्में तो फिर भी गनीमत है कि अंत में दिखा देती हैं कि बुरा का अंत बुरा होता है लेकिन यह सीरियल जैसा नाम सीरियल!!!वैसा काम सीरियल!!सालों साल चलने वाला सीरियल सारे पारिवारिक संबंधों की धज्जियां उड़ाता है और स्त्रियां अपने खाली समय में बड़े आराम से इन सीरियलों को देखती हैं और इन सीरियलों के चरित्र को अपने जीवन में उतारती हैं घर में महाभारत रचती हैं देखा देखी पहनावा, देखा देखी रहन-सहन, देखा देखी नाच गान, देखा देखी षड्यंत्र, देखा देखी जिंदगी में आग लगाना देखा देखी कचहरी में जाकर अपने कानून का दुरुपयोग करना बस इतना ही काम रह गया है इनको । किसी के जन्मे बेटे से इनको सिर्फ जिस्मानी संबंध का लोभ रह गया है बाकी वह मरे या जिए इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इनके लिए सैकड़ों रास्ते खुले हुए हैं लेकिन यह नहीं जानती हैं कि जब यही कृत्य उनके अपने संतान के साथ होगा तब क्या हाल होगा ?क्योंकि कर्म लौटकर वापस जरूर आता है।
सुमन झा “माहे “गोरखपुर

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