संघर्ष की कहानी — रमेश शर्मा

आज आपके एक ऐसे युवक से परिचित कराते हैं जो मध्यम वर्गीय परिवार से अपनी मेहनत के बल पर एक बड़े मुकाम तक पहुंचे।
पिता बिजली बोर्ड में स्टेनोग्राफर माता गृहणी और पांच भाईबहन। कितना मुश्किल होता है एक पिता के लिए परिवार के खर्च को चलाना। इसका एहसास भाईबहन में सबसे बड़े पुत्र शेखर को था। उनमें शुरू से ही कक्षा में मेहनत करकेअच्छे नंबरों लगन थी। साथ ही अपने भाई बहनों को भी वो पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते थे।
शुरुआत में बारहवीं तक उनका परिवार ब्यावर राजस्थान में रहा। बाद में पिताजी का ट्रांसफर जयपुर हो गया। उनके पिता जी ने अपने बड़े भाई के पास ही उसी कालोनी में लोन लेकर घर बना लिया। एक तो जयपुर शहर में रहना और फिर घर का लोन साथ में पांच बच्चों की पढ़ाई का बोझ , बड़ी आर्थिक समस्या रहती थी।
शेखर इन परिस्थितियों को समझता था और अपने लिए एक बेहतर जीवन का लक्ष्य बना कर उसने सी ए करने का निश्चय किया। काम बहुत कठिन था, ना कोई गाइड करने वाला और ऊपर से प्रतिदिन का आर्थिक संकट। लेकिन वह इन सब मुश्किलों से लड़ते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में दिन रात जुटा रहा। शेखर एक संवेदनशील और मधुर भाषा युवक जिससे मिलता अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ देता।
आखिर मेहनत रंग लाई और उसने सीए कर लिया।
संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ क्योंकि उसने नौकरी न कर स्वयं की प्रेक्टिस करने का फैसला लिया। धीरे धीरे समय बदलता गया।
आज वह अपनी प्रतिष्ठित संस्था के माध्यम से जयपुर में बेहतर जीवन जी रहे हैं। साथ ही अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों को निभा रहे हैं।
अपने परिवार और समाज में लोगों के लिए एक प्रेरणाश्रोत हैं।
रमेश शर्मा




