Uncategorized

चार साल बाद कदंब डूंगरी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब लक्खी पौष बड़ा महोत्सव में जयकारों के बीच 80 हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण की पंगत प्रसादी

 

जयपुर। सरना डूंगर रीको एरिया स्थित कदंब डूंगरी रविवार को उस समय भक्ति, सेवा और उल्लास के विराट संगम का साक्षी बनी, जब पावन मंगल सेवा संस्थान की ओर से महंत सीतारामदास महाराज के सानिध्य में 42वां लक्खी पौष बड़ा महोत्सव आयोजित किया गया। सुबह से ही क्षेत्र में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। चार साल बाद पूरा इलाका मेला स्थल जैसा दृश्य प्रस्तुत करता नजर आया।
सुबह होते ही जयपुर शहर और आसपास के ग्रामीण अंचलों से वाहनों की लंबी कतारें कदंब डूंगरी की ओर बढ़ती दिखाई दीं। कार, बस, ट्रैक्टर-ट्रॉली, दोपहिया वाहनों और पैदल आते श्रद्धालुओं के बीच “जय श्री राम”, “सीताराम जी महाराज की जय” और “पौष बड़ा महोत्सव की जय” के गगनभेदी जयकारे लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
संस्थान की व्यवस्थापिका सोनिया दासी ने बताया कि महोत्सव का शुभारंभ प्रातः ठाकुर श्री सीताराम जी महाराज, मंगलदास जी महाराज एवं शिव मंदिर में भोग अर्पित कर आरती के साथ हुआ। इसके बाद कन्या पूजन एवं संत प्रसादी का आयोजन किया गया। जयपुर मंडल सहित अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा और हरिद्वार से पधारे 2100 से अधिक साधु-संतों एवं कन्याओं को ससम्मान भोजन कराया गया।

कार्यक्रम स्थल पर पूरे दिन भजनों की मधुर स्वर लहरियां वातावरण को भक्तिमय बनाती रहीं। “राम नाम की मस्ती” में डूबे श्रद्धालु भजनों पर झूमते-गुनगुनाते नजर आए। कहीं कीर्तन मंडलियां रामधुन गा रही थीं तो कहीं महिलाएं मंगल गीतों में सहभागिता कर रही थीं।
संत प्रसादी के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का क्रम प्रारंभ हुआ। विशाल पंगतों में एक साथ चार से पांच हजार श्रद्धालु बैठकर प्रसादी ग्रहण करते रहे। दोपहर से लेकर देर रात्रि तक यह क्रम निर्बाध चलता रहा। करीब 500 स्वयंसेवक सेवा भाव से पंगत में प्रसादी परोसते रहे, वहीं व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में भी जुटे रहे।
दिन भर चले इस आयोजन में करीब 80 हजार श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। सरना डूंगर, रीको इंडस्ट्रियल एरिया, बैनाड़, खोरा, लालचंदपुरा, किशनपुरा, गोविंदपुरा, हाथोज, मंशारामपुरा, मुरलीपुरा, झोटवाड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु परिवार सहित शामिल हुए।
श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता का यह महोत्सव देर शाम तक भक्ति, भजनों और जयकारों के बीच शांतिपूर्ण एवं ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। पावन मंगल सेवा संस्थान की ओर से सभी संतों, श्रद्धालुओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!