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डॉ. निर्मला शर्मा ने भाई डॉ. गिरधारी को जन्मदिन पर साझा की बचपन की भावुक यादें

 

उदयपुर। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं उदयपुर जिला कांग्रेस कमेटी (विधि, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग) के जिलाध्यक्ष डॉ. गिरधारी के जन्मदिन पर उनकी बहन डॉ. निर्मला शर्मा ने बचपन की खट्टी मीठी यादों को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया। डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि बचपन में दोनों भाई बहन खूब लड़ते-झगड़ते थे। छोटी-छोटी बातों पर मुंह फुलाना, एक-दूसरे की शिकायत करना, पिताजी से डांट पड़वाना ये सब उस समय भले झगड़े लगते थे, पर आज वही यादें दिल को गुदगुदाती हैं।
उन्होंने कहा, मजेदार बात यह थी कि शिकायत करने के बाद भी हम एक-दूसरे को पिताजी की डांट से बचाने की कोशिश करते थे। बचा लेते तो एकांत में कहते ‘इस बार बचा लिया, अगली बार नहीं बचाऊँगी।’ और यही कहते-कहते फिर झगड़ा शुरू हो जाता। एक प्रसंग याद करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार झगड़ा इतना बढ़ गया कि भाई ने कह दिया ‘जा, तुझसे कभी राखी नहीं बंधवाऊँगा।’ बस उसी पल रोना शुरू हो गया। लेकिन शाम तक राखी भी बंधी, मिठाई भी खाई और जैसे कुछ हुआ ही नहीं। डॉ. निर्मला ने बताया कि बचपन के झगड़ों में डांट अक्सर भाई को ही पड़ती थी। पिताजी समझाते क्यों झगड़ता है, ये तो एक दिन पराए घर चली जाएगी। तुझसे बड़ी है, जीजी कहा कर। माँ भी सौम्यता से दोनों को समझातीं। उन्होंने कहा कि समय के साथ संबोधन बदले
जो भाई बचपन में ‘जीजी’ नहीं कहता था, वही आज सम्मान से ‘दीदी आप’ कहकर बुलाता है। अब वह कभी ‘तू’ नहीं कहता। यही समय का सुंदर परिवर्तन है। रिश्तों की मजबूती पर उन्होंने कहा, बचपन के ये छोटे-छोटे झगड़े ही भाई–बहन के प्यार को गहराई देते हैं। आज जब जीवन की भागदौड़ में कोई साथ नहीं होता, तब सबसे पहले भाई ही खड़ा मिलता है। बाकी रिश्ते औपचारिक हो सकते हैं, पर भाई–बहन जैसा प्रेम कोई नहीं। भाई के जन्मदिन पर उन्होंने मंगलकामनाएँ देते हुए कहा—मेरे अनुज की उत्तरोत्तर प्रगति हो, वह हमेशा खुश रहे, प्रसन्न रहे। परिवार और हम सब उसी पर गर्व महसूस करते रहें। जन्मदिन की असंख्य शुभकामनाएँ।
— डॉ. निर्मला शर्मा
(भाई–बहन का प्यार, बचपन की यादें)

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