Uncategorized

विषय:सत्य ही धर्म  – प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या

 

भारतीय दर्शन में “सत्य” को सर्वोच्च मूल्य माना गया है। उपनिषदों का उद्घोष “सत्यमेव जयते” यह स्पष्ट करता है कि अंततः विजय सत्य की ही होती है। धर्म का वास्तविक स्वरूप किसी कर्मकांड, परंपरा या बाह्य आडंबर में नहीं, बल्कि सत्य के आचरण में निहित है। इसलिए कहा गया है,सत्य ही धर्म है।
सत्य का अर्थ केवल सच बोल देना नहीं, बल्कि विचार, वाणी और कर्म—तीनों में एकरूपता रखना है। जब मन में कुछ, वाणी में कुछ और व्यवहार में कुछ और हो, तब धर्म का क्षरण होता है। सत्य हमें आत्मिक शुद्धता देता है और समाज में विश्वास की नींव रखता है। बिना सत्य के न तो व्यक्ति का चरित्र टिकता है और न ही समाज की व्यवस्था।
धर्म का उद्देश्य मानव को सदाचार की ओर ले जाना है। यदि धर्म सत्य से विमुख हो जाए, तो वह केवल रूढ़ियों का बोझ बनकर रह जाता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्य को दबाया गया, तब-तब अन्याय, हिंसा और अराजकता फैली। इसके विपरीत, सत्य के लिए खड़े होने वालों ने समाज को दिशा दी,चाहे वह राजा हरिश्चंद्र हों या महात्मा गांधी। गांधीजी का सत्याग्रह इस बात का प्रमाण है कि सत्य में अद्भुत नैतिक शक्ति होती है।
सत्य का मार्ग कठिन अवश्य है, परंतु यही मार्ग स्थायी शांति देता है। तात्कालिक लाभ के लिए असत्य का सहारा लेने से क्षणिक सफलता मिल सकती है, पर उसका परिणाम अंततः दुखद होता है। सत्य व्यक्ति को निर्भीक बनाता है, क्योंकि जिसे छिपाने को कुछ नहीं, उसे डर भी नहीं लगता। सत्य आत्मसम्मान को पुष्ट करता है और अंतरात्मा को संतोष देता है।
आज के भौतिकतावादी युग में सत्य अक्सर सुविधा के तराजू पर तौला जाता है। रिश्तों, राजनीति, व्यापार,हर क्षेत्र में सत्य से समझौता दिखाई देता है। ऐसे समय में “सत्य ही धर्म” का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यदि हम सत्य को अपने जीवन का आधार बना लें, तो नैतिक संकट स्वतः कम हो सकते हैं।
अंततः धर्म का सार करुणा, न्याय और सत्य में है। सत्य के बिना धर्म खोखला है और धर्म के बिना सत्य निष्प्राण। जब सत्य को जीवन में उतारा जाता है, तब धर्म जीवंत होता है। इसलिए यह कहना सर्वथा उचित है कि सत्य ही धर्म है, और इसी के पथ पर चलकर व्यक्ति और समाज दोनों का कल्याण संभव है।

स्वरचित मौलिक
प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!