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बसंत पंचमी –उर्मिला पाण्डेय उर्मि

बसंत पंचमी भारत में बड़ा उत्सव माना जाता है।बसंत पंचमी से मौसम थोड़ा बदलने लगता है शिशिर ऋतु का कहर कम हो जाता है।इसी माता सरस्वती का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है माता सरस्वती ज्ञान बुद्धि विवेक बल देने बालीं हैं।
जब भगवान विधि ने अर्थात बृह्मा जी ने सृष्टि की रचना की सूर्य चंद्रमा तारे पर्वत पृथ्वी नक्षत्र आदि सभी बना दिए लेकिन बिना ज्ञान के सब अधूरा था ज्ञान प्रकाश का द्योतक होता है माता बृह्मा जी ने ज्ञान की देवी शारदे मां का स्मरण किया माता सरस्वती इसी बसंत पंचमी के दिन चार भुजाएं धारण किए हुए प्रकट हुईं उनके दो हाथों में वीणा तीसरे हाथ में माला और चौथे हाथ में पुस्तक लिए हुए थीं बृह्मा जी ने कहा सबके मन मस्तिष्क में विराजिए सभी में ज्ञान बुद्धि विवेक का संचार कीजिये। माता ने सभी को ज्ञान के लिए अच्छा बुरा जानने के लिए प्रेरित किया। सभी देवी देवताओं ने माता सरस्वती का पूजन किया विशेष रूप से बृह्मचर्य अवस्था में मां बाणी की पूजा बहुत अनिवार्य है क्योंकि माता सरस्वती सभी को ज्ञान देने वालीं हैं विद्या अध्ययन के समय माता सरस्वती की पूजा आवश्यक होती है। ज्ञान का रंग पीला केसरिया होता है अतः माता को उस दिन पीले वस्त्र पहनाए जाते हैं और सभी लोग पीले वस्त्र ही पहनते हैं पीले फूल माता पर चढ़ाए जाते हैं प्रसाद भी पीला ही होता है। इस प्रकार माता सरस्वती का पूजन होता है यह त्योहार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है बसंत ऋतु आने को होती है शिशिर ऋतु जाने को होती है इस खुशी में भी यह त्योहार मनाया जाता है।
उर्मिला पाण्डेय उर्मि

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