मेरा प्रेरणा दायक व्यक्तित्व — पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)

जीवन में माता पिता भाई बहन मित्रों सह कर्मियों गुरुजनों सहित अनेक प्रेरणादायक व्यक्तित्व होते हैं।लेकिन कोई कोई प्रेरणादायक व्यक्तित्व ऐसा भी होता है जो हमेशा के लिए जीवनभर अपने दिल पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं और प्रेरणा का पुंज बन जाता है।मेरे जीवन में एक ऐसा व्यक्ति आया जिसने मुझे प्रेरित किया मेरे दृष्टिकोण को बदल दिया और मुझे जीवन के सही मायने समझाएं।वो थे मेरे गुरुजी जो एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के धनी थे। जब मैं सातवीं कक्षा में पढ़ता था तब वो मेरे क्लास टीचर थे।उनकी अच्छी सादगी आत्मविश्वासने मुझे आकर्षित किया।वह एक साधारण व्यक्ति थे लेकिन उनके विचार और दृष्टिकोण बहुत बड़े थे। मुझे आगे बढ़ने के लिए उन्हें मुझे मार्गदर्शित किया।उनसे मैं सरलता सज्जनता सिखी।मानव जीवन ईश्वरीय वरदान है।स्वयं में महान है और इसके समुचित प्रयोग और सहयोग से ही कल्याण है। जीवन को धधकते अंगारों जैसी परिस्थितियों में झांकना पड़ता है।पहाड़ जैसे ताने खड़ी समस्याओं से टकराना पड़ता है। संघर्ष जीवन का सन्मार्ग होता है मैंने इसको सीखा है।मैं एक गरीब परिवारसे था।परिस्थिति वश मैने कार्य भी किया है ।इससे जीवन जीने को साहस मिला है।जो कार्य दूसरा कर सकता है हम क्यों नहीं कर सकते ही जीवन की सीढ़ी है।लक्ष्य प्राप्त करने की आतुरता ही परिश्रम में रंग लाती है।आगे बढ़ाते और लक्ष्य तक पहुंचती है और असफलता मिले तो अपने कार्यों को नहीं अपने द्वारा क्या कमी रह गई है इस बात को सोचना है।जीवन स्वयं ही स्वयं का गुरु है। हमारा आत्मा ही हमें उत्तर देगा। चिंतन ही गुरु मंत्र है।जो स्वयं को नहीं समझ सकता वह कुछ भी नहीं समझ सकता। आत्मा से बलिष्ठ बनना और मन को अपने वश में रखना ही सफलता का मूल मंत्र है। जीवन में संपत्ति एकत्रित करना सफलता नहीं है। आपके विचारों से किसी के पैर का कांटा निकलता है तो वह विचार संसार की अक्षुण निधि है और वह आप की लक्ष्य पुंजी है।उन्होंने मुझे जीवन जीना सिखाया उसने सिखाया की जीवन में कभी हार नहीं मानना है।चुनौतियों को सामना करना लक्ष्य को प्राप्त करने प्रेरित किया। मैंने अपने जीवन में एक नई दिशा में कदम बढ़ाये।आज भी जो कुछ भी हूं उसका श्रेय गुरु जी को जाता है। जिन्होंने मुझे प्रेरित किया और मुझे जीवन के सभी मायने समझाएं।आज वो हयात नहीं है मगर उनकी दी गई प्रेरणा मेरे साथ है।ये गुरुजी को जब तक हमारा जीवन रहेगा हम नहीं भूलेंगे।ऐसे प्रेरणादाई व्यक्ति को कोटि कोटि नमन।
“मातापिता गुरु है बड़े सदा राखिए मान,
शिक्षा जीवन में मिलें करते ग्रंथ बखान।”
श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)




