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विलुप्त होती प्रजाति बचाओ – शिक्षाविद् एवं अधिवक्ता दीपक शर्मा

 

आज मैं एक जागरूक नागरिक के नाते समाज के सामने एक गंभीर प्रश्न रखना चाहता हूँ—क्या हमारे देश से ईमानदार लोग विलुप्त होते जा रहे हैं? ईमानदार पत्रकार, निर्भीक नेता, निष्ठावान लोकसेवक, कर्तव्यपरायण अफसर, निष्पक्ष जज और न्यायप्रिय मजिस्ट्रेट—ये सभी अब किसी दुर्लभ प्रजाति की तरह दिखाई देने लगे हैं।

जिस प्रकार वन्यजीवों की विलुप्ति पर हम चिंता जताते हैं, संरक्षण योजनाएँ बनाते हैं, उसी प्रकार आज आवश्यकता है ईमानदारी और नैतिकता के संरक्षण की। यदि समय रहते समाज ने इन्हें बचाने का संकल्प नहीं लिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल किताबों और किस्सों में ही “ईमानदार अधिकारी” या “निडर पत्रकार” के बारे में पढ़ेंगी।

ईमानदार व्यक्ति आज सबसे अधिक अकेला है। वह न तो सत्ता के गलियारों में सुरक्षित है, न ही समाज के शोर में उसकी आवाज़ सुनी जाती है। सच बोलने वाला पत्रकार दबाव में आ जाता है, भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा अफसर दंडित होता है, और निष्पक्ष निर्णय देने वाला जज आलोचनाओं और संदेहों से घिर जाता है। ऐसे में प्रश्न यह नहीं है कि ईमानदार लोग कम क्यों हो रहे हैं, बल्कि यह है कि हम उन्हें कितना सुरक्षित महसूस कराते हैं।

लोकतंत्र की असली ताकत संस्थानों से अधिक जनता में होती है। जब जनता चुप रहती है, तब अन्याय ताकतवर हो जाता है। जब जनता सच का साथ देती है, तभी ईमानदारी जीवित रहती है। आज ज़रूरत है कि हम अपने आसपास के ईमानदार लोगों की पहचान करें, उनका समर्थन करें, और आवश्यकता पड़ने पर उनके साथ खड़े हों—चाहे वह सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाना हो, या सार्वजनिक रूप से समर्थन देना।

राजनीति, प्रशासन, न्यायपालिका और मीडिया—ये सभी समाज के स्तंभ हैं। यदि इन स्तंभों में ईमानदारी कमजोर पड़ गई, तो पूरी इमारत ढहने में देर नहीं लगेगी। इसलिए ईमानदार नेता को वोट से, ईमानदार अफसर को विश्वास से, ईमानदार पत्रकार को संरक्षण से और ईमानदार न्यायाधीश को सम्मान से मज़बूत करना होगा।

आज यह लेख किसी एक व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि एक सामूहिक चेतावनी है। अभी भी समय है। यदि जनता जाग जाए, तो यह “विलुप्त होती प्रजाति” फिर से फल-फूल सकती है। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब हम कहेंगे
कभी इस देश में ईमानदार लोग भी हुआ करते थे। ईमानदारी को बचाना किसी और की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है।
एक जागरूक नागरिक शिक्षाविद् एवं अधिवक्ता दीपक शर्मा

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