विश्व पुस्तक मेले में हुआ डाॅ. आर. डी. गौतम विनम्र जी की पुस्तक ‘नज़रों के सामने’ का शानदार विमोचन

जयपुर। भारत मंडपम् विश्व पुस्तक मेले में कवि डाॅ. आर डी गौतम विनम्र की पुस्तक नजरों के सामने का विमोचन अंतरराष्ट्रीय कवि डाॅ. राकेश सक्सेना एवं डाॅ. सुनीता सक्सेना के कर कमलों द्वारा हुआ। इस अवसर पर शंभू दयाल इंटर काॅलेज गाजियाबाद के प्रधानाचार्य राष्ट्रीय कवि डाॅ. देवेंद्र देव, राष्ट्रीय कवयित्री एवं मालती देवी सेवा संस्थान की संस्थापिका गाजियाबाद से डाॅ. निवेदिता शर्मा, साहित्य प्रेमी सेठ मुकुंद लाल इंटर कालेज गाजियाबाद के प्रवक्ता नवीन कुमार , गाजियाबाद वैशाली से डाॅ. सुधा बसोर सौम्या , साहित्य उपवन रचनाकार के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ. रोहित रोज , कवि जोगेंद्र सिंह , कवि राजवीर सिंह निम, बौद्धाचार्य अमरचंद बौद्ध , बौद्धाचार्य मलखान सिंह , रोहित गौतम कवि की पत्नी गीता गौतम एवं पुत्र कोमल प्रकाश एवं अनंत यश, उपस्थित रहे। डाॅ. राकेश सक्सेना एवं डाॅ. सुनीता सक्सेना ने कवि आर. डी. गौतम को शाॅल एवं मोतियों की माला पहनाकर एवं एक प्रतिष्ठित हिन्दी गौरव सम्मान से सम्मानित किया। डाॅ. निवेदिता शर्मा ने अंगवस्त्र एवं मोतियों की माला एवं फूलों से महकता गुलदस्ता देकर कवि का मान बढ़ाया। वहां उपस्थित सभी गुणीजनों ने कवि का विधिवत सम्मान किया और पुस्तक हेतु हृदय से बधाई एवं शुभकामनाएं दी। ट्रू मीडिया के संस्थापक प्रबंधक ओमप्रकाश प्रजापति की उपस्थिति से कार्यक्रम और भी भव्य बन गया। काव्य जगत के उपस्थित सभी हस्ताक्षरों ने शुभकामनाओं हेतु अपने मुखारविंद से बारी बारी से कुछ पंक्तियां भी पढ़ीं जिससे कार्यक्रम काव्यमय बन गया। अंतरराष्ट्रीय कवि डाॅ. राकेश ने पुस्तक के लिए कहा- नजरों के सामने कवि के मन का अंतर्मन का दर्पण है जिसमें अनुपम व अनूठी छवि की रचनाएं हैं। डाॅ. सुनीता सक्सेना ने कहा नजरों के सामने कृति समय से संवाद करती हैं। नजरों के सामने काव्य कृति की सभी रचनाएं ऑर्गेनिक हैं जो अनुभूति की जमीन पर उगाई गई हैं। राष्ट्रीय कवयित्री डाॅ. निवेदिता शर्मा ने नजरों पर बेहतरीन मुक्तक पढ़कर रंग जमा दिया उन्होंने पढ़ा…
‘कभी इजहार की बातें कभी इंकार की बातें,
नैनो ने नैनो से की मनुहार की बातें।
मोहब्बत करने वालों के अलग संवाद होते हैं,
भरी महफिल में कर लेते हैं ये प्यार की बातें।’
साहित्य उपवन रचनाकार के संस्थापक अध्यक्ष डाॅ. रोहित रोज जी ने एक कवित्त पढ़कर पुस्तक के शीर्षक की सार्थकता प्रकट की…
दृश्य जो भी घटनाएं अंतर्मन को छू गईं,
उनकी ही बयानी है नजरों के सामने।
ख़ामोश अधर रहे हृदय में कोलाहल,
भावों की ही जुबानी है नजरों के सामने।
वक्त ने जो रंग भरे जीवन पटल पर,
तस्वीर वह यानी है नजरों के सामने।
‘रोज’ अनुभूतियां ये और तो किसी की नहीं,
तेरी मेरी कहानी है नजरों के सामने।
नज़रों के सामने पुस्तक की सबने भूरि भूरि प्रशंसा की और शुभकामनाओं में कहा कि इस पुस्तक का स्वागत साहित्य जगत अवश्य करेगा। कवि डाॅ. आर डी गौतम विनम्र ने सभी अतिथियों का मुंह मीठा कराया और आभार प्रकट किया।




