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अपना घर  — राजेन्द्र परिहार सैनिक

 

अपना घर प्रत्येक संजीव जीव को अच्छा लगता है। कहते हैं कि घर बिना दर नहीं,,,,शायद यह सच भी है। अपना घर हमेंआश्रय,एक पहचान, और सम्मान प्रदान करता है। रेत,ईंट सीमेंट आदि से निर्मित घर से एक अनूठा ही लगाव होता है।स्वच्छ और सुंदर घर सबको आकर्षित करता है। मेरा घर भी ईंट पत्थरों से बना हुआ एक साधारण सा घर है, किंतु उसमें आपसी सहयोग प्यार दुलार और सद्भावना भरा विश्वास बसताहै,जो अन्यत्र मिलना निस्संदेह मुश्किल है। अपने घर में जो अनूठा सुकून मिलता है,वो सबसे विशेष है जीवन जीने
के वास्ते।अपना घर अपना ही होता है चाहे वो कच्ची
झौपड़ी ही क्यों न हो। अपना घर धूप,ताप, सर्दी व
बरसात से संसक्षण करता है। दुनिया में आप कहीं भी
चले जाइए, कितने ही आलीशान मकान में चले जाएं,
किंतु जो अपनापन अपने घर में मिलता है वो और कहीं
नहीं मिल सकता। घर बनता है परिवार से और परस्पर
स्नेह भरे समन्वय से।अपना घर शान्ति का मंदिर समान
होता है।

राजेन्द्र परिहार सैनिक

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