फागोत्सव – केवल रंगों का खेल नहीं, अंतर्मन का उल्लास -डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा
फागुन की आहट प्रकृति में परिवर्तन और मन में नई उमंग का संदेश लाती है। फागोत्सव केवल देह पर गुलाल मलने का त्योहार नहीं, बल्कि भीतर की जड़ता को त्यागने का महापर्व है। जिस तरह वसंत में पुराने पत्ते झड़ते हैं, फाग हमें सिखाता है कि जीवन में नई कोंपलों के लिए पुरानी कुंठाओं का विसर्जन अनिवार्य है।
इसका आध्यात्मिक पक्ष गहरा है ;जहाँ ‘मसान की भस्म’ वैराग्य सिखाती है, वहीं ‘ब्रज का गुलाल’ प्रेम का उत्सव। होलिका दहन वास्तव में हमारे भीतर व्याप्त ईर्ष्या और अहंकार की आहुति है। आज के मशीनी युग में, जहाँ हम मुखौटों में क़ैद हैं, फाग वह क्षण है जब गुलाल की ओट में पद और प्रतिष्ठा के भेद मिट जाते हैं और ‘अद्वैत’ की स्थापना होती है।
विडंबना है कि आज का उत्सव शोर और रसायनों में सिमट गया है। वास्तविक फाग वही है जो आत्मा की धूल झाड़ दे। इस फागुन, हाथ में गुलाल लेने से पहले विचार करें कि क्या हम किसी के रिक्त जीवन में प्रेम का रंग भर सकते हैं? यदि हाँ, तो ही हमारा फागोत्सव सार्थक है।
-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा
अहमदाबाद,गुजरात।



