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विधा:लघु कथा- खुली दुनिया का कैदी – अनीता स्वरा..

 

एक छोटा सा परिंदा, जिसका नाम पंखी था, एक विशाल बगीचे में अपने माता-पिता के साथ रहता था। वह हर दिन आकाश में उड़ने का सपना देखा करता था, लेकिन उसके पैरों में एक भारी जंजीर बंधी हुई थी। यह जंजीर उसे उसके मालिक ने बांधी थी, ताकि वह उड़ न सके और बगीचे से बाहर न जा सके।

पंखी का दिल तड़पता था, क्योंकि वह खुले आकाश में उड़ने और दुनिया को देखने का सपना देखता था। वह अपने पिंजरे के भीतर ही सीमित था। हर दिन वह अपने पंखों को फड़फड़ाता, लेकिन जंजीर के कारण वह कभी भी उड़ नहीं पाता था।

एक दिन, उसने अपने मालिक से पूछा, “क्या मैं कभी स्वतंत्र हो सकता हूँ? क्या मैं कभी आकाश में उड़ सकता हूँ?”

मालिक हंसा और बोला, “तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है। तुम खुले आसमान में उड़ सकते हो, लेकिन तुम्हारी जंजीर तुम्हारे भीतर है। अगर तुम खुद को सही तरीके से समझ पाओ, तो ये जंजीर कोई मायने नहीं रखेगी।”

पंखी को यह बात समझ में आ गई। उसने धीरे-धीरे अपनी जंजीर को तोड़ने का प्रयास किया, न केवल बाहरी जंजीर को, बल्कि अपने डर और संकोच को भी। उसने महसूस किया कि असल जंजीर उसकी सोच थी, जो उसे खुद से डराती थी।

आखिरकार, पंखी ने अपनी जंजीर को तोड़ा और खुली दुनिया में उड़ने के लिए स्वतंत्र हो गया। अब वह जानता था कि असली स्वतंत्रता कभी बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि भीतर से आती है।

अनीता स्वरा..

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