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लघ कथा: सहसा कार्य कभी ना करें– श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)

 

एक छोटे से गांव में परबतभाई और उसकी पत्नी प्रियंका रहते थे।दोनों बहुत ही मेहनती किसान थे। उनके खेत में केले का पौधा लगा हुआ था। एक दिन प्रियंका ने सोचा पौधे के आसपास जो घास उगी हुई है उसे काट दे।त कि पौधे का विकास अच्छी तरह हो।उसने वह घास काट दी जाय।उसके पति परबतभाई पाइप जोड़कर पौधों को पानी पिला रहे थे। उसकी पत्नी प्रियंका ने केले की लूम देखी तो उसे रहा नहीं गया। धारदार दंतारी उठाई और केले की लूम को काटने लगी। परबतभाई तो पौधों को पानी पिलाने में व्यस्त था। प्रियंका क्या कर रही है कुछ पता नहीं था। केले की लूम काटने जल्दी के कारण उसके हाथ में से दंतारी छटक गई और जाकर परबतभाई के सिर पर लगी। सिर में से लहू बहने लगा। तब गांव में से एक बुड्ढे व्यक्ति वहां आया उसने यह सब हादसा देखा था।उसने समझाया; ‘किसी भी काम को सोच समझकर करना चाहिए।’काम में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।इस पास में क्या हो रहा है उसका ध्यान रखना चाहिए।सहसा कार्य कभी भी मत करना। किसी भी काम बल से नहीं बुद्धि से किया जाता है। केवल मेहनत नहीं कार्य करने में अच्छा ज्ञान भी होना जरूरी है। कार्य करते वक्त पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। प्रियंका ने अपनी गलती का एहसास हुआ उसने सीख ली काम में कभी भी जल्दबाजी नहीं करें। समझदारी से किया काम सफल ही होता है।

श्री पालजीभाई वी राठोड ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)

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