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उदयपुर में पिछोला झील किनारे लोक संस्कृति और परम्पराओं के अनूठे संगम ने बांधा समा

 

नानालाल आचार्य
नजर इंडिया

उदयपुर। जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग के साझे में विश्व प्रसिद्ध मेवाड़ महोत्सव का आगाज शनिवार को धूमधाम से हुआ। इस अवसर पर हुए विविध पारंपरिक आयोजनों के दौरान झीलों के सौंदर्य के साथ ही मेवाड़ की संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। पुराने शहर में घंटाघर से गणगौर घाट तक विभिन्न समाज की ओर से गणगौर सवारी निकाली गई। विभिन्न समाज की महिलाओं एवं पुरूषों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर गणगौर की सवारी निकाली। लोकगीतों एवं लोकनृत्यों के साथ लोक संस्कृति की अनुपम छटा के बीच निकली गणगौर की सवारी से वातावरण सुरम्य और आकर्षक बन गया। इस दौरान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, जिला पुलिस अधीक्षक डॉ अमृता दुहन आदि बतौर अतिथि उपस्थित रहे। पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुनीता सरोच, उपनिदेशक शिखा सक्सेना अिद ने अतिथियों का स्वागत किया।
शाही गणगौर ने किया मंत्रमुग्ध
बंशी घाट से गणगौर घाट तक शाही ठाठ-बाट के साथ निकली गणगौर की शाही सवारी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। राजसी ठाट-बाट के साथ पिछोला झील की लहरों के संग मधुर स्वर लहरियों के बीच निकली गणगौर की सवारी ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सजी-धजी गणगौर व ईशर जी ने सभी को किया आकर्षित
गणगौर के पर्व पर शिव-पार्वती के रूप में पूजनीय गणगौर व ईशर जी की अनूठी छवि विशेष आकर्षक का केन्द्र रही। महिलाओं के सिर पर आकर्षक वेशभूषा एवं श्रृंगार से सुसज्जित गणगौर व ईशर जी की प्रतिमा ने सभी को आकर्षित किया। राजमाली समाज की गणगौर प्रथम, मारू कुमावत समाज की द्वितीय तथा कहार भोई समाज की गणगौर को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। शाम को गणगौर घाट पर लोक संस्कृति का अनूठा संगम दिखा। संस्कृति का प्रदर्शन करते लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोहा। पिछोला झील के किनारे इस आयोजन के अनूठे संगम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर आतिशबाजी भी की गई।

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