गड्ढों में दबी जिम्मेदारी: हनुमान वाटिका की सड़क बनी जनता के लिए अभिशाप

धूल, गड्ढों और बदहाल व्यवस्था के बीच जीने को मजबूर लोग, जिम्मेदार एजेंसियां मौन
जयपुर। शहर के गोकुलपुरा स्थित हनुमान वाटिका A (100 फीट रोड, महाराणा प्रताप रोड) क्षेत्र में सड़क की दुर्दशा ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है। लंबे समय से यह सड़क पूरी तरह जर्जर अवस्था में पड़ी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक आंखें मूंदे बैठे हैं।
सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं और अधिकांश हिस्सा कच्चा होने के कारण वाहनों के गुजरने पर धूल के गुबार उठते हैं। हालात इतने बदतर हैं कि स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और राहगीरों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। धूल के कारण लोगों में खांसी, एलर्जी, आंखों में जलन और सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि यह सड़क शिव मंदिर के सामने स्थित है। प्रतिदिन मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं विशेषकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बुजुर्ग गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। बरसात के मौसम में यह सड़क किसी खतरे से कम नहीं रहती। गड्ढों में पानी भर जाने से यह मार्ग जानलेवा बन जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यही नहीं, इसी रास्ते से रोजाना स्कूल के छात्र-छात्राएं गुजरते हैं, जिनकी सुरक्षा के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय निवासी चेतन तिवाड़ी व अशोक बीलवाल ने बताया कि सड़क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि धूल और गड्ढों के कारण क्षेत्र के लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, फिर भी प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब नदारद हैं। जनता के हितैषी बनने का ढोंग करने वाले जनप्रतिनिधि और अधिकारी आज इस समस्या से मुंह मोड़ चुके हैं। जेडीए और नगर निगम जैसे जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस सड़क की तत्काल मरम्मत कर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। साथ ही नियमित सफाई और धूल नियंत्रण के लिए पानी के छिड़काव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर जनता की आवाज यूं ही अनसुनी होती रहेगी?



