हनुमान जन्म, हनुमान जन्मोत्सव। उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

आप सभी यह जानते होंगे कि हनुमान का जन्म चैत्र पूर्णिमा को हुआ ऐसा नहीं है चैत्र पूर्णिमा को हमारे परम पावन स्थान पर विराजमान मेंहदीपुर बालाजी महाराज हनुमान का स्थापना दिवस है बजरंगबली हनुमान जी का जन्म जो माता अंजनी के पुत्र थे उनका जन्म कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हुआ था उनके जन्म के अनेक कारण हैं एक तो यह कारण है कि जब दशरथ जी ने पुत्रेष्टि यज्ञ श्रृंगी ऋषि के द्वारा करवाया उसमें मिली प्रसाद स्वरूप खीर को दशरथ जी अपनी रानियों को बांट रहे थे उसी समय एक चील सुमित्रा के हाथ से खीर लेकर चली गयी उसने वह खीर माता अंजनी जो पूजा में लीन थीं उनके हाथों की अंजुरी में वह खीर डाल दी माता अंजनी ने भगवान का प्रसाद मानकर उस खीर को खा लिया जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ।दूसरा कारण है भगवान शंकर के तेज के स्खलित हो जाने पर उस तेज़ को पवन देव ने अपनी शक्ति से अंजनी माता जहां गुफा में तपस्या कर रहीं थीं वहीं उनके सम्मुख नदी में डाल दिया अंजनी उसे पी लिया जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ तभी तो हनुमान जी को शंकरसुवन शंकर सुत कहा जाता है और पवन देव ने उस तेज को ले जाने में सहायता की थी इस कारण पवनसुत पवनपुत्र भी कहा जाता है। माता अंजनी के पति केसरी थे इस कारण हनुमान जी को केसरी नंदन कहा जाता है जब इंद्रदेव ने हनुमान की हनु अर्थात ठोड़ी पर गदा मार दी तभी से बजरंगी को हनुमान कहा जाता है क्योंकि उनकी ठोड़ी तभी से दब गयी थी महावली होने के कारण इनको महावला कहा जाता है।लक्ष्मण के प्राण बचाने के कारण लक्ष्मण प्राणदाता भी कहा जाता है। बोलो जय बजरंगबली जय हनुमान उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।




