प्रेम: एक गहन भावना — डॉ इंदु भार्गव जयपुर

“प्रेम” एक अत्यंत सरल लेकिन गूढ़ शब्द है — दो अक्षरों का, परंतु इसके अंदर मानव जीवन की असंख्य भावनाएँ समाहित होती हैं। यह सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि अस्तित्व का एक आधार है, जो हमें दूसरों से जोड़ता है, हमें संवेदनशील बनाता है, और हमारे आसपास की दुनिया में प्रकाश भर देता है!
संस्कृत मूल से आया यह शब्द “मन में कोमल भावना” का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमे यह चाह होती है कि कोई वस्तु, व्यक्ति या उद्देश्य सदा हमारे साथ रहे, उसकी उन्नति हो, और हम उसके कल्याण की कामना करें।
प्रेम हमें इंसान बनाता है। यह दूसरों के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता जगाता है! समाज की नींव: जब लोग प्रेम से जुड़े रहते हैं, तो उनमें विश्वास, सहयोग और समझदारी बढ़ती है, जो समाज को मजबूत बनाती है।
आध्यात्मिक आयाम:गीता के उपदेशों के अनुसार, सच्चा प्रेम स्वार्थ से ऊपर होता है, यह सेवा, त्याग और समर्पण का मार्ग हैl दिव्य प्रेम: कुछ धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों में प्रेम को ईश्वर की एक अभिव्यक्ति माना गया है जैसे वैश्विक प्रेम, जो सीमाओं और स्वार्थों से परे होती है।
आज के आधुनिक युग में “प्रेम” शब्द का अर्थ कुछ लोगों के लिए केवल आकर्षण या स्वार्थ का ही पर्याय बन गया है। जैसे कि एक विश्लेषण कहता है “हम उस युग में पहुंच गए हैं जहाँ प्रेम करना कुछ-कुछ बड़ा अपराध जैसा माना जाने लगा है।”
इंसान कई बार असल प्रेम और क्षणिक मोहब्बत में फर्क करना भूल जाता है।
सीखना पड़ता है: प्रेम एक स्वभाव नहीं, बल्कि एक पर्यायवाची शब्दों मे देखें तो :प्रेम के कई रूप होते हैंजैसे स्नेह, अनुराग, प्रणय, भक्ति जो हमें प्रेम की गहराई और प्रकार को समझने में मदद करते हैं! निरंतर अभ्यास: प्रेम सिर्फ महसूस करने की भावना नहीं है, इसे व्यवहार में उतारना पड़ता है समर्पण, सेवा, समझदारी और त्याग के ज़रिए!!
“प्रेम” केवल एक शब्द नहीं, एक अनुभव है एहसास हैं जीवन की यात्रा को अर्थ देने वाला, हमें बेहतर इंसान बनाने वाला, और समाज को प्यार और सद्भाव से भरने वाला अनुभव। जब हम प्रेम को केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और कला के रूप में अपनाते हैं, तभी यह समाज और व्यक्तिगत जीवन दोनों में सच्ची शक्ति बन सकता है।
डॉ इंदु भार्गव जयपुर



