अनेकता में एकता और हमारे त्यौहार — डॉ इंदु भार्गव जयपुर!!

भारत विविधताओं का देश है यहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म, जातियाँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ पाई जाती हैं। इन सबके बीच भी जो बात हमें एक सूत्र में बाँधती है, वह है “अनेकता में एकता”। हमारे त्यौहार इस एकता के सबसे सुंदर प्रतीक हैं!!
भारत में हर धर्म, हर समुदाय के अपने-अपने पर्व हैं, परंतु इन त्यौहारों की खुशी केवल एक समाज तक सीमित नहीं रहती। दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व, पोंगल, ओणम, बैसाखी, ये सभी त्यौहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं।
सरकार इन के लिए छुट्टी भी घोषित करती हैं और सारी व्यवस्थायें की जाती हैं किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जाता! लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, और एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं!!
त्यौहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक एकता, प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के प्रतीक हैं। जब हम एक-दूसरे के पर्वों में सम्मिलित होते हैं, तो हमारे दिलों में आपसी सम्मान और अपनापन बढ़ता है। यही भावना भारत की असली पहचान है!!
इस प्रकार हमारे त्यौहार यह संदेश देते हैं कि भले ही हम भाषाओं, रीति-रिवाजों और परंपराओं में भिन्न हों, परंतु हम सब एक हैं। सच ही कहा गया है!
“अनेकता में ही हमारी एकता बसती है, और हमारे त्यौहार उसका सजीव उदाहरण हैं।”
“त्यौहारों का देश” और “अनेकता में एकता का प्रतीक” कहा जाता है!!
डॉ इंदु भार्गव जयपुर!!




