मेरी सांसों की परछाईं — मेरी प्यारी सी लाडो अंशुल के नाम
आस-पास जब मुश्किलों की शीतल लहरियों में मेरा दम घुटने लगता है, तब तुम्हारी उसी प्यारी मुस्कराहट की चादर ओढ़कर मैं फिर से सांस ले पाती हूँ। चाहे समय की तपती धूप हो या बारिश की तेज़ बौछारें
मेरे पास न कोई छतरी है, न कोई छत
बस तुम्हारी मुस्कान ही है, जो मुझे हर बार ज़िन्दा रहने का हौसला देती है।कभी-कभी तुम मुझे सपनों की किसी सोन-चिरैया सी लगती हो, जो अनजाने से डर में आकर मेरी छाती में दुबक जाती है। और जब तुम्हारी धड़कनें मेरी धड़कनों से मिलकर प्रेम का मधुर संगीत रच देती हैं, तो बरबस ही मेरी आँखों के कोर भीग जाते हैं। काल की क्रूरता के वे दिन याद आते ही, मन तुम्हारे लिए दुआओं से भर जाता है, और मैं तुम्हारी उम्र के एक-एक मोती चुनती चली जाती हूँ। आज यूँ ही अपने कमरे में बैठी, बाहर होती रिमझिम बारिश की दीवानी होती जा रही हूँ। खिड़की के शीशे से चेहरा सटाए, बारिश की हर बूंद को हरी-हरी पत्तियों से फिसलते हुए, सड़क की रेत में कहीं खोते हुए देखती हूँ। उनका वजूद भी ठीक वैसा ही है, जैसा मेरे चेहरे पर तुम्हारे लिए मेरा प्यार—जो कभी दिखाई नहीं देता, फिर भी वहीं होता है, चुपके से, भीतर कहीं छिपा हुआ। मेरे भीतर का ममता-रस भी बूँद-बूँद टपकता रहता है। कभी आँखों की शिराओं से बहकर चेहरे पर आ जाता है, और कभी यूँ ही सूख जाता है—मौन, लेकिन गहरा। अक्सर सोचती हूँ तुम्हारे लिए कोई कविता लिखूँ, फिर ठिठक जाती हूँ—आख़िर उसमें ऐसा क्या लिखूँ कि उसके छंद मुकम्मल हो जाएँ? तुम्हारा वजूद ही तो ऐसा है, जिसके आगे सारी कविताओं के रंग फीके पड़ जाते हैं। कल कल्पना की उड़ान में, सपनों के जहान में, मिट्टी के घरोंदे बनाते हुए जब उँगलियाँ सन गईं, तब कविता बनती हुई दिखाई दी मुझे। बड़े जतन से उस घरोंदे को धूप में रख दिया, सोचा शायद इसी से हमारी ज़िन्दगी की खुशियाँ महकेंगी।

फूलों से ख़ुशबू चुराकर, तितलियों से रंग लेकर, और एहसासों के समंदर से सीपियाँ चुनकर भी कविता बन गई। कल जब तुम हमारी ज़िन्दगी की किताब के पन्ने पलटोगी, तो शायद तुम्हें यह एहसास होगा कि ये सारी कविताएँ—सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए लिखी गई हैं।
कविताओं से बुनी हुई ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत होती है। शायद इसी लिए हर सांझ, सूरज की मद्धिम रोशनी में, तुम्हारे लिए एक कविता लिखती हूँ। इन कविताओं से घिरा हुआ तुम्हारा संसार कितना प्यारा होगा यह सोचकर ही मन भर आता है। इस भीड़ भरी दुनिया में भी एक एहसास है, जो तुम्हें मेरे साथ बिताए हर लम्हे की याद दिलाता रहेगा वे लम्हे, जो हमेशा के लिए तुम्हारी ज़िन्दगी में चस्प हो गए हैं।
कितने दिनों से सोच रही थी कि आज के दिन तुम्हें क्या तोहफ़ा दूँ। कुछ समझ नहीं आया, तो ये शब्द ही लिखने बैठ गई। आज बस इतनी-सी ख़्वाहिश है कि आने वाले कई-कई सालों और जन्मों तक तुम यूँ ही मेरी परछाईं बनकर मेरे साथ चलती रहो। क्योंकि तुम मेरी परछाईं ही तो हो, मेरी सांसों की महक तुम ही तो हो। आज का दिन वाकई बहुत ख़ास है—हम साथ हैं, क्योंकि आज ही के दिन तुम इस प्यार भरी दुनिया में आई थीं।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ, मेरी लाडो। तुम्हारी माँ का स्नेह-भरा आशीर्वाद
डॉ डिम्पल सैनी




