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मकर संक्रांति एक संदेश। उर्मिला पाण्डेय,

सभी भाई एवं बहिनों को मकर संक्रांति का शुभ संदेश।
मकर संक्रान्ति मनाने का कारण है कि राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के के उद्धार के लिए गंगा जी ने इसी दिन सगर पुत्रों का उद्धार किया समुद्र में जाकर मिलीं थीं राजा भागीरथ गंगा जी को पृथ्वी पर लेकर आए थे।इसी दिन गंगा सागर में साल में केवल एक वार ही गंगा सागर स्नान के लिए जा सकते हैं संक्रांति के वाद कपिल भगवान का मंदिर समुद्र में डूब जाता है करोड़ों भक्तों की भीड़-भाड़ होती है।
कहावत है कि सब तीर्थ वार वार गंगा सागर एक वार।
दूसरा कारण है कि भीष्म पितामह ने जब सूर्य उत्तरायण आ गये थे तभी अपने प्राणों को त्यागा इसलिए उस दिन सीधा निकालते हैं क्योंकि भीष्म पितामह का श्राद्ध किया जाता है। भगवान कृष्ण ने भीष्म पितामह से कहा था कि आपने इतनी कठिन प्रतिज्ञा की कि कोई भी नहीं कर सकता मैं तुम्हें यह वरदान दे रहा हूं कि तुम्हारा श्राद्घ सभी लोग किया करेंगे इस कारण इसमें सीधा निकाला जाता है और सूर्य देवता अपने पुत्र शनि से मिलने जाते हैं इस कारण ही यह मकर संक्रांति मनाई जाती है
अब सन 2080 ई० तक 15 जनवरी को ही होगी मकर संक्रांति !
एक भाई ने पूछा मकर संक्रान्ति अब 15 जनवरी को क्यों हो रही है ? इसका शास्त्रोक्त कारण बताया गया है। मुझे युक्ति युक्त लगा इसलिए आप से साझा कर रही हूं।

उन्होंने लिखा है कि अब सन 2008 से सन 2080 ई तक मकर संक्राति 15 जनवरी को ही होगी।
विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है।
2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।
ज्ञातव्य रहे, कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायण का माना जाता है।
सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण प्रति वर्ष लगभग 20 मिनिट विलम्ब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है।
यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व, 72 वषों के अंतराल के बाद एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।
विशेष:- लोगों की यह धारणा पूर्णतः भ्रामक है कि मकर संक्रांति का पर्व हमेशा 14 जनवरी को आता है।
इस बर्ष बैसे भी 14, जनवरी को तिलसटाएकादशी है एकादशी को चावल दान करना और खाना पाप माना जाता है इस कारण 15, जनवरी को ही मकर संक्रान्ति मनाई जाएगी।
यह जानकारी अपने सभी मित्रों तक पहुंचाएं।
जय श्री राम जय गंगा माता जय भीष्म जय सूर्य भगवान।

उर्मिला पाण्डेय उर्मि कवयित्री मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

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