सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : आस्था, अस्मिता और राष्ट्रबोध का महोत्सव — रुचि रानी गुप्ता चंदलाई जयपुर
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, यह भारत की आत्मा, अस्मिता और अडिग स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व देश के लिए गर्व और गौरव का उत्सव है उस स्वाभिमान का उत्सव, जिसे बार-बार चोट पहुँचाने की कोशिश की गई, पर जिसे कभी तोड़ा नहीं जा सका। इतिहास साक्षी है कि सोमनाथ मंदिर पर अनेक बार आक्रमण हुए। मंदिर को तोड़ा गया, लूटा गया, अपमानित किया गया, पर आस्था अखंड रही। जिन लुटेरों ने इसे नष्ट करने का दुस्साहस किया, आज उनके नाम इतिहास के ललाट से मिट चुके हैं, किंतु सोमनाथ मंदिर आज भी सिर ऊँचा किए, शान और स्वाभिमान के साथ खड़ा है। यह भारत की सांस्कृतिक जिजीविषा का सबसे सशक्त प्रमाण है। सन 2026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर 9, 10 और 11 तारीख को तीन दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है। यह पर्व केवल स्मृति का आयोजन नहीं, बल्कि संकल्प का उत्सव है अपनी जड़ों से जुड़ने का, अपने गौरवशाली अतीत को समझने का और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ने का संकल्प। सोमनाथ आस्था का केंद्र है। यहाँ शिव साधना में गूँजती ॐ की ध्वनि सम्पूर्ण वातावरण को शुद्ध और दिव्य बना देती है। अरब सागर के तट पर स्थित यह ज्योतिर्लिंग मानो यह संदेश देता है कि प्रकृति, आस्था और चेतना तीनों का अद्भुत संगम ही सनातन परंपरा की आत्मा है। आज गुजरात से पूरी दुनिया सोमनाथ का वैभव देख रही है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है। आधुनिक भारत में सोमनाथ का पुनर्निर्माण और उसका भव्य स्वरूप इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र जब अपने गौरव को पहचान लेता है, तो उसे कोई झुका नहीं सकता।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि सोमनाथ से सनातन का शंखनाद हो रहा है। यह शंखनाद उस आत्मविश्वास का है, जो आज के भारत में स्पष्ट दिखाई देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बनकर उभरा है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें यह याद दिलाता है कि मंदिर केवल पत्थरों से नहीं बनते, वे आस्था, त्याग और संघर्ष से निर्मित होते हैं। यह पर्व आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि भारत की संस्कृति को न तो मिटाया जा सकता है और न ही झुकाया जा सकता है।
सोमनाथ अडिग था, है और रहेगा
आस्था का दीप, स्वाभिमान की ज्योति और राष्ट्र की चेतना बनकर।
रुचि रानी गुप्ता चंदलाई जयपुर




