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“युद्ध में मानवता विनाश” — विनोद कुमार शर्मा

 

सनातन धर्म संस्कृति में देव दानव युद्ध होते रहे जब जब सनातन धर्म संस्कृति का संकट काल रहा प्रभु अवतार ले अवतरित हुए राक्षसों का अंत कर धर्म ध्वजा की रक्षा की आज युद्ध धर्म नहीं निजी महत्वाकांक्षा के कारण वर्चस्व बढ़ाने मानवता को कुचला जा रहा आर्थिक युद्ध तो वैसे भी निरन्तर चलते रहे विकसित देशों और गरीब देशों के बीच गरीबी भुखमरी से लेकिन अब तो युद्ध ऊर्जा संसाधनों के हड़पने साम दाम दंड के रूप में तकनीक और आधुनिक हथियारों से मानवता को विनाश की ओर ले जाने में नहीं हिचक रहे l
युद्ध भले ही दो चार देशों के मध्य हो उसका असर तेजी से पूरे विश्व की अर्थ व्यवस्था पर पड़ रहा विज्ञान ने जीवन जितना सरल बनाया उतना ही अधिक विनाशकारी हथियारों की खोज मानव सभ्यताओं को विनाश की ओर ले जा रहा l
महाभारत युद्ध में एक जीती जागती अर्थव्यवस्था सभ्यता को नष्ट किया कलिंग युद्ध में बीभत्स नर संहार फिर आध्यात्मिक क्रान्ति और बुद्ध के शांति सन्देश से प्रथ्वी को राहत आज फिर आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर युद्धों से मानवता की रक्षा के लिए आध्यात्मिक प्रयासों को आवश्यकता प्रतीत हो रही
तभी मानव जीवन सुखी मानवता सुरक्षित रह सकती धर्म से कट्टरता को समाप्त करने की पहल विश्व स्तर पर होना आवश्यक है l
विनोद कुमार शर्मा

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