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अधूरी राह का साथ– कविता साव पश्चिम बंगाल

 

बरसों पहले की बात है। गाँव के उस छोटे से रास्ते पर, जहाँ आम के पेड़ों की छाया दोपहर को भी ठंडी बना देती थी, वहीं पहली बार आरव ने नंदिनी को देखा था। हाथ में किताब, आँखों में सपने, और चेहरे पर एक ऐसी सहज मुस्कान,जो किसी भी बेचैन मन को ठहरना सिखा दे।
धीरे-धीरे बातें शुरू हुईं। पहले रास्तों तक सीमित, फिर ख़तों तक, और फिर उन ख़ामोशियों तक,जहाँ शब्दों की ज़रूरत ही नहीं रहती। दोनों ने कभी खुलकर “प्रेम” नहीं कहा, पर हर एहसास उसी ओर इशारा करता था।
नंदिनी को शहर जाना था—पढ़ाई के लिए। उस दिन बारिश हो रही थी। आरव ने बस इतना कहा,
“जल्दी लौट आना।”
नंदिनी मुस्कुरा दी, पर उसकी आँखों में अनकही आशंका तैर गई।
शहर ने नंदिनी को बदल नहीं दिया, पर उसके चारों ओर की दुनिया बदल गई। ज़िम्मेदारियाँ, परिवार का दबाव, और एक तय रिश्ता,सब कुछ अचानक तय हो गया। उसने बहुत कोशिश की, पर हर बार शब्द गले में अटक जाते। आखिरकार, उसने एक आख़िरी ख़त लिखा,
“कुछ रिश्ते पूरे नहीं होते, फिर भी जीवन भर साथ रहते हैं”
जब वह ख़त आरव तक पहुँचा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गाँव की वही राह अब भी थी, पेड़ भी थे, पर जैसे सब कुछ स्थिर हो गया था। आरव रोज़ वहीं बैठता, जहाँ कभी नंदिनी खड़ी होकर बातें किया करती थी।
साल बीतते गए।
एक दिन, किसी शादी में दूर से उसने नंदिनी को देखा,भीड़ में, मुस्कुराते हुए, अपने परिवार के साथ। उनकी नज़रें मिलीं, पर दोनों ने ही कुछ नहीं कहा। बस एक हल्की सी मुस्कान, जिसमें अनगिनत अधूरे वाक्य छिपे थे।
उस दिन आरव को समझ आया,
प्रेम का अंत हमेशा मिलन नहीं होता,
कभी-कभी वह एक शांत स्वीकार में बदल जाता है।
अब भी जब बारिश होती है, उस गाँव की राह पर कोई खड़ा दिखाई देता है,
शायद यादें,
या फिर कोई ऐसा प्रेम, जो कभी खत्म नहीं हुआ, बस अधूरा रह गया।
कविता साव
पश्चिम बंगाल

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