Uncategorized

श्री सरस निकुंज: श्रीमद्भागवत कथा में कराया माधुर्य भाव की बाल लीलाओं का श्रवण

जयपुर। सुभाष चौक दरीबा पान स्थित आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को ठाकुरजी की माधुर्य भाव की बाल लीलाओं और आसुरी तत्वों के उद्धार के प्रसंगों की सरस कथा हुई। शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में व्यासपीठ से मदन मोहन दास महाराज ने कहा कि भगवान ने भक्तों के मनोगत भावों के अनुसार लीलाएं की और सुख प्रदान किया। भगवान ने राक्षसों का भी संहार नहीं बल्कि उद्धार ही किया। उन्होंने अघासुर और धेनुकासुर जैसे राक्षसों का भी खेल-ही-खेल में उद्धार कर दिया। भगवान किसी का वध नहीं करते, बल्कि उनके स्पर्श मात्र से जीव का कल्याण हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने मुख्य रूप से ब्रज में तीन लीलाएं करने के लिए अवतार लिया था- माखन चोरी लीला, गौचारण लीला और महारासलीला। भगवान कृष्ण ने ब्रज में रहते हुए कभी जूते-चप्पल या सिले हुए वस्त्र धारण नहीं किए। वे यह बताना चाहते थे कि ब्रज की रज की अद्भुत महिमा है। जो ब्रजराज को मस्तक पर धारण करता है, उसे किशोरी राधा रानी की प्राप्ति होती है।
गोचरण लीला में भगवान ने गौ सेवा की, जिसके कारण उनका नाम गोपाल पड़ा। आगे चलकर, जब मैया यशोदा 56 प्रकार के व्यंजन तैयार कर रही थीं और भगवान ने भूख लगने की बात कही, तो यशोदा ने इंद्र की पूजा का हवाला दिया। भगवान कृष्ण ने नंदबाबा से गोवर्धन पूजन का आग्रह किया, जिस पर नंदबाबा भी सहमत हो गए। इसके बाद सभी ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजन प्रारंभ किया। इंद्र का अभिमान नष्ट करने के लिए उन्होंने गोवर्धन धारण की लीला की। गोवर्धन गिरिराज कलयुग के प्रत्यक्ष देव हैं। जो गिरिराज जी का पूजन और परिक्रमा करता है, गिरिराज महाराज उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस अवसर पर श्री सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने पधारे संतों-महंतों एवं श्रद्धालुओं का सम्मान किया।

आचार्य शुक देव जी महाराज का जयंती महोत्सव 17 को:

आचार्य शुक देव जी महाराज का जयंती महोत्सव 17 अप्रेल को श्री सरस निकुंज में मंगल महोत्सव समाज के रूप में मनाया जाएगा। दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक बधाईगान, नृत्य और प्रवचन के कार्यक्रम होंगे। रात्रि आठ से अगले दिन सुबह पांच बजे तक महोत्सव समाज, वाणी पाठ, बधाईगायन, नृत्य, आचार्य विनय के कार्यक्रम होंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!