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गणेश प्राकट्य — उर्मिला पाण्डेय उर्मि

श्री गणेश भगवान का प्राकट्य बहुत ही विकट परिस्थितियों में चारों तरफ अंधकार छा जाने पर हुआ।
जब चारों ओर बिघ्न छाए हुए थे संसार में अराजकता फैली हुई थी।उस समय माता पार्वती ने बिघ्न बिनासक परम पभु परमात्मा का आवाहन किया और अपने शरीर का उबटन करके एक पुतला बनाया और प्राण मंत्र डालकर उसके हाथ में गदा पकड़ा दी उसका नाम लम्बोदर रखा। भादों मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी को पुतला बनाया और उसे दरवाजे पर रक्षा हेतु पहरेदारी में बैठा दिया।
माता स्नान करने और अपना वृत उपवास करने लगीं।
दसवें दिन माता पार्वती के पास भगवान शिव जी आए परंतु द्वार पर खड़े हुए लम्बोदर पार्वती पुत्र ने अंदर नहीं जाने दिया।
सभी देवता भी आएऔरकहा कि शिवजी को अन्दर जाने दो परंतु विघ्न-विनाशक ने एक न सुनी और सभी देवताओं को हरा दिया।अंत में शिवजी ने उस बालक से कहा कि हमें अंदर जाने दो परंतु विघ्न-विनाशक ने नहीं मानी शिवजी ने क्रोध में आकर उस बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती के कुपित होने पर भगवान शिव ने भगवान बिष्णु से कहा कि जो भी सबसे पहले आपको जीव मिले उसका सिर ले आओ उसी के अनुसार भगवान बिष्णु हाथी का सिर लाए भगवान शिव ने हाथी का सिर रख कर प्राण मंत्र डालकर उसे भादों मास शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को जीवित कर दिया और उनका नाम गणेश रखा।गणेश जी के आते ही सारी बिघ्न बाधाएं ख़त्म हो गई।बातावरण में शांति छा गई अंधेरा ख़त्म हो गया विद्या बुद्धि बल देने वाले गणेश भगवान प्रकट हुए।
तभी से चतुर्थी और चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है।
बोलिए गणेश भगवान की जय।🙏
उर्मिला पाण्डेय उर्मि कवयित्री मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

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