कलम की शक्ति: समाज के हित में ज्ञान और विचार का अमूल्य साधन।

लेखक: लोकेश झा
कलम केवल शब्दों का माध्यम नहीं है; यह समाज को दिशा देने और बदलाव की ताकत है। इतिहास में पत्रकारों, कवियों और साहित्यकारों की कलम ने अंधकार में रोशनी फैलाई और समाज में सुधार की लहरें उठाईं।
पत्रकारों की कलम सच दिखाती है। वे भ्रष्टाचार और अन्याय को उजागर करते हैं और लोगों को सोचने और सवाल उठाने के लिए प्रेरित करते हैं।
कवियों और साहित्यकारों की लेखनी लोगों के दिलों और सोच को छूती है। उनकी रचनाएँ सकारात्मकता और मानवीय मूल्यों को फैलाती हैं।
जो लोग पढ़ते, सीखते और अनुभव साझा करते हैं, उनकी कलम में समाज बदलने की ताकत होती है। यह ताकत धन और बल से भी अधिक प्रभावशाली होती है, लेकिन कई बार डर या प्रलोभन के कारण कलम उनके साथ बिक जाती है, जिसका दुष्परिणाम समाज को भुगतना पड़ता है।
आज लेखक लोकेश झा उन सभी कलमधारियों को यह संदेश भेजते हैं: आपके हाथ में कलम है, और समाज ने आपको ऐसे मंच पर खड़ा किया है जहां आपकी बातों का असर अलग होता है। इसका उपयोग सही मार्गदर्शन और दिशा देने में करें, ताकि समाज में नई चेतना जाग सके।
समाज तभी प्रगतिशील और सशक्त बन सकता है जब सोच जागरूक, आवाज़ सशक्त और विचार सकारात्मक हों। और इस परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन है—कलम।



