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काव्यपाठ और खाटूश्याम यात्रा — उर्मिला पाण्डेय

 

बड़े सौभाग्य की बात है कि मैं अबकी बार खाटूश्यामजी के दर्शन करके ही मेरी जयपुर से वापसी हुई।
ललिता भोला जी के द्वारा अपने पिता की स्मृति में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का प्रोगाम हुआ जिसमें दूर दूर से कविगण आए थे अपने पिता के नाम से ही अपनी साहित्यिक संस्था का नाम भोलानाथ साहित्य अकादमी रखा इससे बेटी का पिता के प्रति कितना अटूट प्रेम प्रदर्शित होता है 7/12/2025,को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एक लव्य इंटरनेशनल स्कूल में मैं भी पहुंची मैनपुरी से जाने बाले कवियों में दो कवि नहीं आए लेकिन मैंने हार नहीं मानी संतोष द्विवेदी के साथ मैं जयपुर पहुंचीं सभी ने अच्छा काव्य पाठ किया बहुत आनंद आया वहां कवियों ने काव्य की रसमयी गंगा बहाई वहां प्रोगाम के बाद संतोष द्विवेदी ने मना कर दिया कि मैं आज नहीं जाऊंगा। आगरा से आने बाले राकेश तेनगुरिया जी भी चले आए मुझसे कहा भी नहीं मैं अकेली रह गई ललिता जी के यहां रात को रुकी बहुत अच्छा लगा उनके द्वारा की हुई खातिरदारी मैं कभी भुला नहीं सकती उतनी दूर से अकेले आने में मुझे परेशानी लगी जिससे मैं 8, दिसंबर को ललिता के साथ खाटूश्याम बाबा हारे के सहारे बाबा श्याम हमारे के दर्शन करने गई शाय़द सभी लोगों ने इसीलिए मेरा साथ छोड़ा कि मुझे खाटूश्यामजी के दर्शन करने थे खाटूश्यामजी मुझे अपने दरबार में बुला रहे थे। ललिता जी के साथ बड़ी अच्छी तरह से खाटूश्यामजी के दर्शन हुए मानों साक्षात् श्याम सुंदर ही हों मुझे बहुत आनंद आया। ललिता भोला के साथ मैंने अच्छी खुले दर्शन किए वहां पर प्रसाद आदि चढ़ाने के लिए लिए भोग लगाया। दर्शन के समय कोई भी कामना याद नहीं आई क्या मांगू भगवान से बस मेरा मन सदा सद्कर्मों में लगा रहे यही चाहती हूं। राधारानी कृपा करें बहुत आनंद हुआ मानों साक्षात् स्वर्ग में मैं घूम रही थी। वहां ललिता जी ने समोसे चाय आदि नाश्ता कराया बहुत खुशी हुई ललिता जी का वह प्रेम व्यवहार देखकर मैंने सोचा कि आचरण सद्व्यवहार सद्विचार आज भी जीवित हैं उनका पालन हो रहा है तभी तो धरती मां टिकी हुई हैं।अगर आचरण सभी के बिगड़ जाएंगे तो शायद महा कलयुग आ जाएगा। अभी महा कलयुग नहीं आया।कलयुग के देवता तो खाटूश्यामजी ही हैं क्योंकि भगवान कृष्ण ने कहा था कि तुम्हारी कलयुग में पूजा होगी।तुम हारे के सहारे बनोगे। भक्त लोग चाहकर भी नहीं जा पाते और मैं बिना चाहे ही खाटूश्यामजी की इच्छा से घूम आई। कैसा चमत्कार हुआ मै घर से सात दिसम्बर को रात को लौटने के लिए ही जयपुर प्रोगाम में गई थी लेकिन खाटूश्यामजी की इच्छा के कारण नहीं लौट पाई। लौटते समय जब मैं ललिता जी के साथ उनके आवास पर पहुंची उसी समय कवि राधे श्याम जी का फ़ोन आया कि मैं कल सुबह ट्रेन से आगरा और वहां से कानपुर जाऊंगा। देखिए कैसा संयोग मैंने खाटूश्यामजी के दर्शन किए और दो रात और एक दिन ललिता जी के यहां रुकी बहुत अच्छा लगा। ललिता जी ने सुबह-सुबह चाय-नाश्ता पानी देकर ही विदा किया ललिता जी और उनका बेटा मोहित मुझे स्टेशन पर छोड़ने आए वहां मेरा लिखा हुआ मुक्तक और राधे श्याम मिश्रा का लिखा हुआ मुक्तक मैंने और ललिता भोला जी ने गाया बहुत ही प्रेरित करने वाले मुक्तक हैं जो ललिता जी को बहुत अच्छे लगते हैं। मेरा मुक्तक है —
जिसको लगन लगी हो भारी। क्या कर लेगी दुनियां सारी।
बाधाएं भी क्या कर लेंगी।
इक दिन होगी विजय हमारी।।
भगवान जब चाहता है तभी उसे अपने दर्शन के लिए तीर्थ स्थान पर अपने धाम पर बुला लेता है।
जय खाटूश्यामजी।

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