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अधिवक्ता परिषद ने मनाया स्थापना दिवस, दत्तोपंत ठेंगड़ी के योगदान को किया याद

भारत माता व दत्तोपंत ठेंगड़ी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ, राष्ट्रवाद और न्याय धर्म की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान

भीलवाड़ा। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का स्थापना दिवस जिला न्यायालय स्थित लाइब्रेरी मे जिलाध्यक्ष रतन लाल जाट व महामंत्री राकेश जैन के नेतृत्व मे मनाया गया| जिला मंत्री पीरू सिंह गौड़ ने बताया कि सर्वप्रथम मुख्य वक्ता ओमप्रकाश शर्मा उपाध्यक्ष , संरक्षक सुरेश चंद्र सुवालका, प्रांत मंत्री राजेश सामरिया, अध्यक्ष रतन लाल जाट , उपाध्यक्ष कीर्ति सोलंकी, विभाग कार्यवाह भगवान जीनगर, महानगर कार्यवाह दीपक सेन ने भारत माता व अधिवक्ता परिषद के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगडी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वालित कर कार्यक्रम की शुरुआत की|
मुख्य वक्ता ओमप्रकाश शर्मा ने अधिवक्ता परिषद के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगडी की जीवनी के बारे मे विस्तार से बताया| उन्होंने बताया कि उन्होंने 15 साल की उम्र में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और 1942 में RSS के प्रचारक बने. उन्होंने भारतीय मजदूर संघ (BMS), भारतीय किसान संघ (Bharatiya Kisan Sangh), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad), सामाजिक समरसता मंच (Samajik Samrasta Manch) और Swadeshi Jagran Manch जैसे कई संगठनों की स्थापना की. वे विभिन्न देशों में एक अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के रूप में काम करने वाली विश्व ट्रेड यूनियन महासंघ के एक अराजनीतिक श्रमिक महासंघ के प्रस्ताव के लिए जाने जाते हैं, जो आज विश्व का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन है.उन्होंने भारतीय मजदूर संघ (BMS): उन्होंने 1955 में भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की, जो आज विश्व का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन है.
भारतीय किसान संघ: उन्होंने 1979 में भारतीय किसान संघ की स्थापना की.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP): वे 1948 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना से जुड़े थे.
सामाजिक समरसता मंच: जातिवाद और अन्य विभाजनों से लड़ने के लिए 1983 में इस मंच की स्थापना की.
स्वदेशी जागरण मंच: 1991 में, उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच की भी स्थापना की. दत्तोपंत ठेंगड़ी का लक्ष्य “श्रमिकों का राष्ट्रीयकरण, राष्ट्र का औद्योगीकरण और उद्योगों का श्रमीकरण” था.
उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक “थर्ड वे” अर्थशास्त्र का खाका प्रस्तुत किया, जो एक आत्मनिर्भर भारत के विचारों पर आधारित था.
वे महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन में भी शामिल हुए थे. उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न संगठनों की स्थापना करके हमेशा समय के साथ तालमेल बनाए रखा.
उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में लगभग 104 पुस्तकें लिखीं. उन्हें संसद में उनके भाषणों के लिए भी याद किया जाता है, जिसमें उन्होंने विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी| संरक्षक सुरेश चंद्र सुवालका ने बताया कि अधिवक्ताओ में राष्ट्रवाद की भावना को जागृत करने के लिए दत्तोपंत ठेंगड़ी ने अधिवक्ता परिषद की स्थापना की| उन्होंने संघ में प्रचारक के रूप में काम किया और न्याय मम धर्म: की भावना समाज में जागृत करने हेतु जीवन पर्यंत कार्य किया|
प्रांत मंत्री राजेश सामरिया ने उपस्थित सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया|
कार्यक्रम का संचालन महामंत्री राकेश जैन ने किया|
कार्यक्रम के दौरान प्रांत कार्यकारिणी सदस्य आदित्य नारायण जाजपुरा, उपाध्यक्ष सुरेश पालीवाल, जिला मंत्री पीरू सिंह गौड़, कोषाध्यक्ष-अंकित शर्मा, विजय शर्मा, बाबू लाल आचार्य, ललित सोनी, अनिल पारीक, नवरत्न जोशी, दीपक शर्मा, आशीष शर्मा, सौरभ बापना, गजेंद्र सिंह कानावत, सूर्यप्रकाश सरगरा, सुमित माली, सुरेश माली, विजय सोनी, सुनील जैन, लोकपाल गुर्जर, ओम निर्मल टाक सहित कार्यकारिणी सदस्य व अधिवक्तागण उपस्थित थे|

पीरू सिंह गौड़ एडवोकेट
जिला मंत्री
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद भीलवाड़ा

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