Uncategorized

माँ से जुड़ी यादें  — रमेश शर्मा

माँ बहुत बीमार थी। उनके पित्त की थैली और लीवर को जोड़ने वाली नली पर कैंसर की गांठ थी। हम दिल्ली पंत हास्पिटल में माने हुए गेस्ट्रो सर्जन डा.चौधरी के पास ईलाज के लिए लेकर गए थे। लेकिन आपरेशन के दौरान वह गांठ फट गई और पूरे शरीर में रक्त में घुल गई। डा. ने जवाब दे दिया। कुछ नहीं हो सकता।
हम जयपुर ले आये और हमारे परिचित कैलाश मामाजी की सहायता से एस एम एस हास्पिटल में भर्ती करवा दिया। इतनी तकलीफ झेलते हुए भी मैंने माँ को जिन्हें हम जीजी कहते थे,दर्द से कराहते नहीं सुना। आज दूसरा दिन था। डा इधर से उधर रेफर कर रहे थे। शाम को डा नेहरा राऊंड पर वार्ड में आये। मैंने पूछा सर कैसी तबियत है। वो बोले शर्मा इन्हें घर ले जाओ और सेवा करो। यहाँ पर ये ज्यादा दुःख पायेंगी। इतने में मैं जीजी के पास आया तो बोली नानू मुझे घर ले चल। हम चारों भाई बहन पिछले अड़तीस दिन से जीजी के साथ थे।
मैंने बाऊजी को डा.की राय और जीजी की इच्छा बताई। उन्होंने कहा ठीक है घर ले आओ। इस दौरान हमारे एक रिश्तेदार का दिल्ली से जीजी की तबियत जानने के लिए फोन आया मैंने कहा घर ले जा रहे हैं। उन्होंने पूरी बात समझे बग़ैर सभी को कह दिया कि मामीजी गई। उन्हें हास्पिटल से घर ले जा रहे हैं। घर पर बाहर वाले कमरे में जहाँ बाऊजी पूजा करते थे वहाँ लिटा दिया। वह पूरे होश में थी।
हम सभी परिवार जन शाम के भजन और आरती करते हैं तो बाऊजी ने भजन गाते हुए उनसे पूछा तुम क्यों नहीं गा रही हो। उन्होंने कहा गा रही हूँ। इस तरह पूरे भजन गाये। आरती ली और आंखें बंद कर ली। ड्रिप चढ़ रही थी। रात्रि साढ़े बारह बजे ऐसा लगा कि उनकी सांसें नहीं चल रही हैं। मैं अपने परिचित डा को बुला कर लाया उन्होंने बताया कि ये आधा घंटा पहले जा चुकी हैं। इस तरह जीजी ने अपने घर में पूजा कर शांति के साथ परलोक गमन किया।
सुबह सभी रिश्तेदार बाहर वाले भी आगये थे। उनका अंतिम संस्कार किया।

ऐसी थी हमारी माता जी। उनकी यादें हमेशा मन में बसी रहती हैं।

रमेश शर्मा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!